ठंडी ही अच्‍छी लगती हैं ये इंडियन स्वीट डेजर्ट्स, खाने का मजा हो जाता है डबल

भारत में स्वीट खाने वालों की कमी नहीं है। ठंडे डेजर्ट्स का मजा तो और भी खास होता है। इनका टेक्सचर क्रीमी, फ्लेवर गाढ़ा और ताजगी भरा हो जाता है, जिससे हर बाइट में मिठास और दोगुना हो जाता है।
Food Sweet

भारत में स्वीट पसंद करने वालों की कोई कमी नहीं है। यहां हर त्यौहार, हर खुशी और यहां तक कि रोजमर्रा के खाने के बाद भी मिठाई की तलाश जरूर होती है। चाहे उत्तर भारत की चाशनी में भीगी जलेबी हो या बंगाल का रसगुल्ला… हर राज्य की अपनी-अपनी मिठाइयां होती हैं, जो लोगों के ज़ुबान को भा जाती हैं। कुछ लोगों को तो मीठा इतना ज्यादा पसंद होता है कि उन्हें के बाद कुछ-न-कुछ मीठा जरूर चाहिए होता है। यहां तक की दावत भी मीठे के बिना अधूरी होती है। ऐसे में अक्सर घरों में हलवा, खीर सहित अन्य कई तरह के अन्य डेजर्ट्स बनते ही रहते हैं।

हालांकि, आज हम आपको उन डेजर्ट्स के बारे में बताएंगे, जिन्हें यदि आप फ्रिज से निकालकर ठंड़ा ही खाते हैं, तो इसका स्वाद डबल हो जाता है। आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं यहां…

मजा हो जाता है डबल

बता दें कि ठंडे डेजर्ट्स का टेक्सचर और फ्लेवर दोनों ही अलग होते हैं। फ्रिज में रखे जाने के बाद मिठाई स्मूद और क्रीमी हो जाती है, जिससे इसका टेस्ट दोगुना हो जाता है। गर्मी के मौसम में तो ऐसे डेजर्ट्स किसी खजाने से कम नहीं लगते। आमतौर पर लोग इन डेजर्ट्स को बड़े ही चाव से खाते हैं, लेकिन ये नहीं जानते कि यदि इन्हें ठंड़ा-ठंडा ही खाया जाए, तो यह अलग ही स्वाद प्रदान करता है।

खीर

इसे चावल, दूध और चीनी से बनाया जाता है। बाद में इसके ऊपर इलायची, बादाम-पिस्ता डालकर इसे सजाया जाता है। ज़्यादातर घरों में खीर गर्मागर्म ही परोसी जाती है, लेकिन अगर इसे एक रात के लिए फ्रिज में रख दिया जाए तो इसका स्वाद एकदम बदल जाता है। ठंडी खीर का दूध गाढ़ा हो जाता है। उसमें नट्स का फ्लेवर और भी निखर जाता है।

श्रीखंड

महाराष्ट्र और गुजरात की शान श्रीखंड अपने आप में बेहद खास डिश है। इसे दही को अच्छे से मथकर उसमें चीनी और इलायची मिलाकर तैयार किया जाता है। श्रीखंड ठंडा खाकर ही सबसे ज्यादा मजेदार लगता है। इसे अक्सर पूड़ी के साथ परोसा जाता है और त्योहारों के मौके पर यह हर थाली में परोसी जाती है। फ्रिज में कुछ घंटे रखने के बाद श्रीखंड का टेक्सचर और भी स्मूद हो जाता है।

रस मलाई

बंगाल से लेकर पूरे भारत में रस मलाई का नाम सुनते ही लोगों के चेहरे खिल उठते हैं। नरम पनीर की टिक्कियों को मीठे, ठंडे और केसर-इलायची वाले दूध में डुबोकर तैयार की गई यह मिठाई दिल जीत लेती है। गरमागरम खाने पर इसका असली मज़ा नहीं आता। जब इसे फ्रिज में ठंडा कर परोसा जाता है, तभी रस मलाई अपने पूरे स्वाद और खुशबू के साथ सामने आती है। यही वजह है कि शादियों से लेकर हर खास मौके पर लोग इसे ठंडी ही सर्व करते हैं।

कुल्फी फलूदा

आइसक्रीम तो हर जगह मिल जाती है, लेकिन कुल्फी का स्वाद बिल्कुल अलग होता है। खासतौर पर जब कुल्फी में फलूदा, गुलाब सिरप और तुलसी के बीज डाले जाएं, तो यह मिठाई एकदम अलग ही एहसास दिलाती है। गर्मियों में कुल्फी फलूदा से अच्छा डेजर्ट और कोई नहीं। इसे चाहे बाजार से लाएं या घर पर बनाएं… ठंडी कुल्फी का हर कौर बच्चों से लेकर बड़ों तक को पसंद आता है।

फिरनी

फिरनी उत्तर भारत की एक और मशहूर मिठाई है। इसे बारीक पिसे चावल, दूध और चीनी से बनाया जाता है। फिर मिट्टी के कुल्हड़ों में भरकर ठंडा किया जाता है। ठंडी फिरनी की खुशबू और स्वाद दोनों ही बेमिसाल होते हैं। इसमें डाली गई केसर और गुलाबजल ठंडी होने के बाद और भी निखर कर सामने आते हैं। कुल्हड़ की मिट्टी की हल्की खुशबू इसे और खास बना देती है।

मिष्टी दोई

बंगाल की शान मिष्टी दोई अपनी सादगी और स्वाद दोनों के लिए जानी जाती है। मीठे दही की यह डिश खाने के बाद पेट को ठंडक देती है। साथ ही ज़ुबान पर हल्की मिठास छोड़ जाती है। ठंडी होने पर इसका स्वाद कस्टर्ड जैसा लगता है, जो हर किसी को पसंद आता है। मिष्टी दोई न सिर्फ बंगाल बल्कि अब पूरे भारत में लोगों की पहली पसंद बन चुकी है।

Sanjucta Pandit
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सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit →
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