
भारत में स्थित देवों की भूमि उत्तराखंड हमेशा से पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां की वादियां, हिमालय की बर्फीली चोटियां, बहती नदियां और शांत झीलें हर किसी के मन को मोह लेती हैं। आमतौर पर जब बात ट्रैवल की होती है, तो लोग नैनीताल, मसूरी या रानीखेत जैसी जगहों का नाम लेते हैं। बता दें कि इन जगहों पर सालभर सैलानियों की भीड़ रहती है। ऐसे में यदि आप भीड़-भाड़ से दूर, शांत और सुकून भरी जगह की तलाश में हैं, तो उत्तराखंड का छोटा-सा गांव आपके लिए बिल्कुल परफेक्ट डेस्टिनेशन साबित हो सकता है।
दरअसल, इस गांव का नाम काणाताल है। यहां बहुत ज्यादा पर्यटक तो नहीं पहुंचते हैं, लेकिन यहां आने वाले लोगों को वापस लौटने का मन नहीं करता है। यहां बहुत ही कम लोग रहते हैं, जो कि अपने यहां आने वाले लोगों का अच्छे से स्वागत करते हैं।
काणाताल (Kanatal)
देहरादून से लगभग 78 किलोमीटर दूर टिहरी गढ़वाल जिले में बसा काणाताल किसी पोस्टकार्ड जैसे खूबसूरत नजारों से भरा हुआ है। चारों ओर देवदार और ओक के घने जंगल, दूर-दूर तक फैली हरी-भरी पहाड़ियां और साफ हवा आपको शहर की भागदौड़ से बिल्कुल अलग इनवाइरोमेंट में ले जाती है। काणाताल का नाम यहां की काणाताल झील से पड़ा था, जो अब सूख चुकी है। झील न होने के बावजूद इस जगह की लोकप्रियता कम नहीं हुई। सुबह से लेकर शांत माहौल जैसे जन्नत होता है। यहां आपको मानसिक तनाव से भी छूटकारा मिलेगा और आपकी ट्रिप मजेदार हो जाएगी।
ट्रिप के लिए परफेक्ट जगह
काणाताल उन लोगों के लिए परफेक्ट है, जो सिर्फ फोटो खींचने या चहल-पहल के लिए नहीं, बल्कि मन की शांति के लिए टूर पर जाते हैं। यहां आपको सुबह चिड़ियों की चहचहाहट के बीच आंख खुलती है और रात में तारों से भरा आसमान देखने का मौका मिलता है। यह जगह मेडिटेशन और परिवार के साथ कुछ क्वालिटी टाइम बिताने के लिए एकदम सही है।
यहां घूमे
- यहां आने वाले लगभग हर यात्री की लिस्ट में सुरकंडा देवी मंदिर जरूर होता है। यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और वहां तक पहुंचने के लिए लगभग दो किलोमीटर का छोटा-सा ट्रेक करना पड़ता है। मंदिर पहुंचने के बाद चारों ओर से हिमालय की चोटियों और घाटियों का 360 डिग्री का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है, जो थकान को पलभर में मिटा देता है।
- काणाताल से कुछ ही दूरी पर स्थित टिहरी झील एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित यानी आर्टिफिशयल झीलों में से एक है। यहां की शांति के साथ-साथ आप एडवेंचर का मजा भी ले सकते हैं। बोटिंग, जेट स्कीइंग और पैरासेलिंग जैसे वॉटर स्पोर्ट्स यहां पर्यटकों को खूब लुभाते हैं।
- अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं, तो कोडाई जंगल आपके लिए किसी खजाने से कम नहीं। यहां पर नेचर वॉक और जंगल सफारी का मजा लिया जा सकता है। घने पेड़ों के बीच से गुजरते हुए आपको हिमालय की दुर्लभ वनस्पतियां और पक्षी देखने को मिलेंगे। यह जगह फोटोग्राफी और बर्ड वॉचिंग के लिए भी बेस्ट है।
कब जाएं काणाताल
काणाताल घूमने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना होता है और पहाड़ों की हरियाली होती है। अगर आप बर्फबारी का मजा लेना चाहते हैं, तो दिसंबर से फरवरी के बीच यहां आ सकते हैं। इस समय पूरा इलाका बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है और यह नजारा किसी सपनों की दुनिया जैसा लगता है।
उठाएं मजा
- यहां कई जगहों पर कैंपिंग की सुविधा है। रात को बोनफायर के बीच बैठकर तारों भरे आसमान का आनंद ले सकते हैं
- यहां ट्रेकिंग और रॉक क्लाइंबिंग जैसे रोमांचक खेलों का मजा ले सकते हैं।
- गांव के लोकल लोगों से मिलकर उनकी संस्कृति और खानपान को करीब से जानना का मौका मिलेगा।
- आप यहां के लोलक मार्केट को भी एक्सप्लोर कर सकते हैं।
आप भी जाएं
इस गांव में रहने की व्यवस्था भी लाजवाब होती है। यहां स्थानीय व्यंजन पर्यटकों को परोसा जाता है, जिसकी कीमत काफी कम होती है और वह स्वाद में लाजवाब होता है। यदि आप भी अपनी वाइफ, फैमिली या दोस्त के साथ ऐसी किसी जगह पर जाने की सोच रहे हैं, तो इस वीकेंड या नवरात्रि की छूट्टियों में यहां जा सकते हैं।
सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

