गंदी बेडशीट से हो सकती हैं बड़ी परेशानियां, जानें हफ्ते में कितने बार बदलना होता है जरूरी!

आजकल लोग बेडरूम सजाने पर ध्यान देते हैं, लेकिन बेडशीट बदलने को नजरअंदाज कर देते हैं। साफ दिखने पर भी बेडशीट पर पसीना, मृत कोशिकाएं और धूल जमती है, जिससे एलर्जी, खुजली और सांस की समस्या हो सकती है।
Bedroom Bedsheet

आजकल हर कोई चाहता है कि उसका बेडरूम बेडशीट स्टाइलिश और सुंदर दिखे। कोई महंगे पर्दे लगाता है, तो कोई कुशन और लैंप से सजाता है। वर्तमान में लोग अपने कमरे को सजाने के लिए इंटिरियर डिजाइनर की सलाह लेते हैं, लेकिन मानिए या न मानिए… बेडरूम की असली खूबसूरती बेडशीट से ही निखरती है। यदि ताजा धुली और अच्छी डिजाइन वाली बेडशीट बिछाई जाए तो कमरे की रौनक बढ़ जाती है। साथ ही सोने में सुकुन आता है। हालांकि, ज्यादातर लोग बेडशीट को सिर्फ दिखावे की चीज समझते हैं। जब तक उस पर दाग-धब्बे या गंदगी साफ नजर न आए, तब तक उसे बदलने की जरूरत ही नहीं समझते। यही सबसे बड़ी गलती है।

यदि आप भी उन लोगों में से जो काफी दिन बीत जाने के बाद भी चादर बदलने में सोचते हैं, तो सावधान हो जाएं। यह सेहत के लिहाज से भी जरूरी है। आज के आर्टिकल में हम आपको इससे जुड़ी पूरी जानकारी देंगे।

क्यों जरूरी है बेडशीट बदलना?

दिनभर की भागदौड़ और थकान के बाद जब हम बिस्तर पर जाते हैं, तो शरीर से पसीना निकलता है। हमारी त्वचा से छोटे-छोटे कण यानी मृत कोशिकाएं भी लगातार निकलती रहती हैं। कमरे की धूल और हवा में उड़ते कण तो अलग से आकर बिस्तर पर जमते ही हैं। यानी साफ दिखने वाली बेडशीट पर भी बैक्टीरिया और धूल-मिट्टी की पूरी फौज तैयार रहती है। अगर लंबे समय तक बेडशीट न बदली जाए, तो यही बैक्टीरिया और धूल हमारी सेहत पर बुरा असर डालते हैं। खुजली, रैशेज, एलर्जी जैसी परेशानियां शुरू हो जाती हैं। कई बार सांस लेने में दिक्कत और अस्थमा जैसी समस्या भी गंदी बेडशीट की वजह से बढ़ सकती है।

कितनी बार बदलें?

चिकित्सकों के अनुसार, हफ्ते में कम-से-कम एक बार बेडशीट बदलनी चाहिए। गर्मियों में जब पसीना ज्यादा आता है, तो तीन-चार दिन पर बदलना और भी अच्छा है। अगर घर में छोटे बच्चे हैं जो बिस्तर पर खाना गिरा देते हैं या पालतू जानवर हैं, जिनके बाल हर जगह उड़ते रहते हैं, तो हर दो-तीन दिन पर बेडशीट बदलना ही बेहतर है। सर्दियों में लोग अक्सर आलस कर जाते हैं और सोचते हैं कि पसीना नहीं आता, तो बेडशीट गंदी भी नहीं होगी। हकीकत ये है कि हमारी त्वचा हर मौसम में मृत कोशिकाएं छोड़ती रहती है और वही बैक्टीरिया का खाना बनती हैं। इसलिए चाहे ठंड हो या गर्मी, बेडशीट बदलने में लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

धोने का सही तरीका

  • कई लोग बेडशीट तो बदल देते हैं, लेकिन धोने में लापरवाही कर बैठते हैं। सिर्फ पानी और साबुन से धो देना काफी नहीं है। कोशिश करें कि गरम पानी में डिटर्जेंट और थोड़ा-सा एंटीसेप्टिक डालकर धोएं। इससे छिपे हुए बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म हो जाते हैं।
  • धोने के बाद धूप में सुखाना सबसे अच्छा तरीका है। सूरज की रोशनी प्राकृतिक कीटाणुनाशक का काम करती है और बदबू भी दूर कर देती है। अगर धूप न मिले, तो कम से कम हवादार जगह पर सुखाना जरूरी है।

साफ बेडशीट के फायदे

आपने गौर किया होगा कि जब बेडशीट साफ होती है, तो नींद भी गहरी और सुकूनभरी आती है। सुबह उठकर शरीर हल्का और तरोताजा महसूस होता है। साफ बेडशीट मौसमी बीमारी और एलर्जी से बचाती है। साथ ही नींद की क्वालिटी भी सही करती है। वहीं, गंदी बेडशीट पर सोने से शरीर बोझिल लगता है, एलर्जी की दिक्कतें बढ़ सकती हैं और बार-बार खांसी-जुकाम भी परेशान कर सकता है।

साफ बेडशीट रखना कोई मुश्किल काम नहीं, लेकिन लोग आलस या व्यस्तता में इसे टालते रहते हैं। साफ ही तो है यह सोचकर हफ्तों तक एक ही बेडशीट बिछाए रहते हैं। अगर आप हर हफ्ते बेडशीट बदलने की आदत डाल लें, तो ये न सिर्फ आपके कमरे की खूबसूरती बनाए रखेगी, बल्कि सेहत की भी रक्षा करेगी।

(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।)

Sanjucta Pandit
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सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit →
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