मुगल की इस बेगाम का चांदी के सिक्के पर छपा था नाम, आती थी घुड़सवारी!

अफगानिस्तान में जन्मीं और बाद में मुगल बादशाह जहांगीर की ये पत्नी बनीं। उन्होंने दरबार में महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसले किए और 1617 में चांदी के सिक्कों पर उनका नाम छपा। अपनी बेटी लाडली की शादी शहजादा शहरयार से कराकर सत्ता में प्रभाव बनाए रखा।
Mughal Emperor AI

भारत में मुगलों का शासन लंबे अरसे तक रहा है। इनकी कहानी बचपन से ही हम इतिहास के पन्नों पर पढ़ते आ रहे हैं। देश के विकास में इनका महत्वपूर्ण योगदान भी रहा है। बाबर की हुकूमत से औरंगज़ेब तक का शासन काल काफी रोचक और मजेदार रहा है। अपने शासनकाल के दौरान मुगलों ने किलो का निर्माण कराया, भव्य मकबरे बनवाए, ताजमहल जैसी अनोखी धरोहर बनवाई, जो आज भारत की पहचान है। यहां सालों भर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है अपने जमाने में बादशाह होने के साथ-साथ जनता के प्रति वह अपनी जिम्मेदारी को भी बखूबी निभाया करते थे। इसके अलावा, युद्ध में भी सभी को परास्त किया करते थे।

अमूमन मुगल बादशाह युद्ध के दौरान परिवार, सैनिक, जनता और अपनी रक्षा के लिए सुरंग बनवाते थे, ताकि जरूरत पड़ने पर वह इसका इस्तेमाल कर सके। बादशाह जहां रहते थे, वहां बहुत सारे कमरों का निर्माण करवाया जाता था। हर किसी के लिए अलग-अलग कमरे बनाए जाते थे। रसोई घर से लेकर बात बगीचे तक की अपनी अलग-अलग महत्वपूर्ण भूमिका होती थी।

आकर्षण का केंद्र

हालांकि, आज हम आपको उन बेगमों के बारे में बताएंगे, जो जो खुद अपनी ही बेटी की सास बन गई थी। जी हां! यह सुनने में बहुत अजीब लग रहा होगा, लेकिन मुगलों में इस तरह के रिश्ते आम बात थी। मुगल साम्राज्य की चमक-धमक और राजमहलों की कहानियां हमेशा ही इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र रही हैं। इस विशाल साम्राज्य में कई शक्तिशाली राजा और रानियां थीं। इनमें सबसे चर्चित और विवादित नाम नुरजहां का है।

अफगानिस्तान में हुआ नूरजहां

सबसे पहले हम आपको बता दें कि नूरजहां का जन्म अफगानिस्तान में हुआ था, जिनका असली नाम मेहरून्निसा था। बाद में जब उन्होंने मुगल बादशाह जहांगीर से शादी की, तो उन्हें नूरजहां का नाम दिया गया। कहा जाता है कि नूरजहां केवल एक रानी नहीं थीं, बल्कि वह दरबार की नीतियों और फैसलों में अपनी अहम भूमिका निभाती थी। उनका राजनीतिक दिमाग इतना तेज था कि जहांगीर भी कई अहम फैसले उनके सहमति के बिना नहीं लेते थे।

इतिहास

इतिहास में दर्ज है कि साल 1617 में जहांगीर ने चांदी के सिक्के जारी किए, जिन पर नूरजहां का नाम खुद जहांगीर के साथ छपा था। नूरजहां के शासनकाल में उनकी लोकप्रियता और शक्ति का स्तर इतना ऊंचा था कि लोग उन्हें फेमिनिस्ट रानी भी मानते हैं। उन्हें शिकार और घुड़सवारी का हुनर भी आता था, जो उस दौर की महिलाओं में कम ही देखने को मिलता था।

राजनीतिक कदम

राजनीति में नूरजहां की सबसे बड़ी चाल यह थी कि उन्होंने अपनी पहली शादी से हुई बेटी लाडली की शादी शहजादा शहरयार से करवाई। दरअसल, नूरजहां चाहती थीं कि शहरयार ही बादशाह का उत्तराधिकारी बने। उनका यह राजनीतिक कदम सत्ता के खेल में अपनी पकड़ मजबूत करने का तरीका था। हालांकि, इतिहास में लिखा है कि सत्ता संघर्ष में शाहजहां ने जीत हासिल की और जहांगीर की मृत्यु के बाद नूरजहां का प्रभाव धीरे-धीरे कम हो गया।

(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।)

Sanjucta Pandit
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सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit →
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