पति-पत्नी के रिश्ते में क्यों घुस आता है कोई तीसरा? इमोशनल अटैचमेंट के 5 चौंकाने वाले कारण

कई बार शादीशुदा लोग अपने पति या पत्नी से ज्यादा जुड़ाव किसी और से महसूस करने लगते हैं। यह इमोशनल अटैचमेंट रिश्तों को तोड़ भी सकता है और बदल भी सकता है। आइए समझते हैं क्यों लोग शादी के बाहर भी किसी और इंसान के साथ गहरा जुड़ाव महसूस करने लगते हैं।
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शादी को हमेशा भरोसे, प्यार और साथ का रिश्ता कहा जाता है। लेकिन सच ये है कि हर शादी में यह बैलेंस हमेशा कायम नहीं रह पाता। बहुत से कपल्स शिकायत करते हैं कि वक्त के साथ उनका रिश्ता बदलने लगता है। पति-पत्नी के बीच वही इमोशनल वॉर्मथ और गहराई नहीं रह पाती जो शुरुआती दिनों में थी। और यही कमी कभी-कभी इंसान को बाहर से पूरा करने का मन करने लगती है।

आपने अक्सर सुना होगा कि शादीशुदा लोग कभी-कभी अपने पार्टनर को छोड़कर किसी और इंसान से ज्यादा जुड़ जाते हैं। यह जुड़ाव सिर्फ शारीरिक आकर्षण तक सीमित नहीं होता, बल्कि भावनात्मक यानी इमोशनल अटैचमेंट का रूप ले लेता है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों ऐसा होता है? आखिर क्यों इंसान उस रिश्ते की तलाश करता है, जिसकी डोर पहले से बंधी हुई है? आइए जानते हैं इसके पीछे के 5 बड़े कारण।

शादी के बाहर इमोशनल अटैचमेंट क्यों होता है?

शादीशुदा होने के बावजूद किसी और से गहरा जुड़ाव महसूस करना कई कारणों से हो सकता है। यह इंसान की भावनात्मक जरूरतों, रिश्ते में कमी और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। नीचे दिए गए 5 कारण सबसे आम माने जाते हैं।

1. रिश्ते में इमोशनल सपोर्ट की कमी

किसी भी रिश्ते की जान है बातचीत और भावनाओं को समझना। जब पति-पत्नी एक-दूसरे को सुनना बंद कर देते हैं, या फिर उनकी प्रॉब्लम्स और इमोशन्स को हल्के में लेने लगते हैं, तो इंसान अकेलापन महसूस करने लगता है। ऐसे में अगर कोई तीसरा व्यक्ति उसकी भावनाओं को समझे, ध्यान से सुने और सपोर्ट करे तो वहां एक नया कनेक्शन बनने लगता है।

2. रोज़मर्रा की बोरियत और रूटीन लाइफ

शादी के शुरुआती सालों में रोमांस और उत्साह ज्यादा होता है। लेकिन वक्त के साथ अक्सर रिश्ता एक रूटीन का हिस्सा बन जाता है। हर दिन वही काम, वही बातें और वही माहौल। इस बोरियत से बचने के लिए इंसान नयापन खोजने लगता है। अगर इसी दौरान कोई नया शख्स उनकी जिंदगी में आता है जो चीजों को दिलचस्प और अलग बनाता है, तो उसकी ओर आकर्षण होना आम बात है।

3. वैल्यू और सराहना की चाहत

हर इंसान चाहता है कि उसे इज्जत, प्यार और महत्व मिले। जब पति या पत्नी अपने साथी की तारीफ करना बंद कर देते हैं या उनकी अहमियत कम समझने लगते हैं, तो वह इंसान उस जगह से वैल्यू खोजता है जहां उसकी सराहना हो। यही वजह है कि कई लोग ऑफिस के किसी कलीग या पुराने दोस्त की ओर ज्यादा खिंच जाते हैं, क्योंकि वहां उन्हें वो ‘इम्पॉर्टेंस’ महसूस होता है जो घर पर नहीं मिलता।

4. अधूरी इच्छाएं और अपूर्णता की भावना

शादीशुदा जीवन में हर इंसान की कुछ उम्मीदें होती हैं, चाहे वो प्यार हो, केयर हो या फिर क्वालिटी टाइम। जब ये इच्छाएं अधूरी रह जाती हैं, तो इंसान खुद-ब-खुद ऐसी जगह तलाशने लगता है जहां ये खालीपन भर सके। ऐसे रिश्ते शुरुआत में छोटे-से कंफर्ट से शुरू होते हैं और धीरे-धीरे गहरे भावनात्मक जुड़ाव में बदल जाते हैं।

5. डिजिटल क्लोजनेस और आसान कनेक्शन

आज सोशल मीडिया और चैटिंग ऐप्स की वजह से किसी से भी कनेक्ट होना बेहद आसान हो गया है। कई बार लोग अनजाने में ही किसी से रोज बातचीत करने लगते हैं। यह बातचीत धीरे-धीरे पर्सनल हो जाती है और एक इमोशनल बॉन्ड का रूप ले लेती है। कई बार यह बॉन्ड शादीशुदा रिश्ते से भी ज्यादा मजबूत महसूस होने लगता है।

क्या हर इमोशनल अटैचमेंट गलत होता है?

यह समझना जरूरी है कि हर इमोशनल अटैचमेंट एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर नहीं होता। कभी-कभी यह सिर्फ दोस्ती और सपोर्ट तक सीमित रहता है। लेकिन अगर यह आपके और आपके जीवनसाथी के रिश्ते में दूरी ला रहा है तो यह चिंता का विषय है।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, ऐसी स्थिति में सबसे जरूरी है कि आप अपने पार्टनर से खुलकर बातचीत करें। अपनी इच्छाओं और परेशानियों को दबाने के बजाय साझा करें। अगर जरूरत हो तो रिलेशनशिप काउंसलर की मदद लेना भी सही विकल्प है।

रिश्ते को बचाने के लिए जरूरी टिप्स

  • एक-दूसरे के साथ ईमानदारी और ट्रांसपेरेंसी रखें।
  • क्वालिटी टाइम बिताएं और छोटी-छोटी खुशियों को साथ एंजॉय करें।
  • अपने पार्टनर की तारीफ करने और इमोशनल सपोर्ट देने की आदत डालें।
  • डिजिटल डिस्टर्बेंस को कम करें और एक-दूसरे को प्राथमिकता दें।
  • अगर समस्या गंभीर हो तो रिलेशनशिप काउंसलिंग जरूर लें।
Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। तथ्यों की पड़ताल, महत्वपूर्ण मुद्दों को समझना और निष्पक्ष खबरों के जरिए लोगों की आवाज़ बनना मेरी पत्रकारिता की पहचान है। View all posts by Bhawna Choubey →
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