
दुनिया में एक से बढ़कर एक व्यंजन हैं, जिसे लोग बड़े ही चाव से खाना पसंद करते हैं। अमूमन भारत में किसी भी साधारण परिवार में दाल, रोटी, चावल और सब्जी खाने में बनाया जाता है। जिससे वह सब पोषक तत्वों की कमी दूर होती है। साथ ही प्रोटीन, विटामिन, मिनरल शरीर को मिल पाता है। इस साधारण से खाने को खाने से व्यक्ति स्वस्थ भी रहता है।
आज के आर्टिकल में हम आपको दुनिया की सबसे पुरानी डाल के बारे में बताने जा रहे हैं, जो पथरी गलाने का काम करती है। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि इसका उत्पादन भारत में भी किया जाता है।
कुल्थी की दाल (Kulthi Ki Daal)
दरअसल, इस दाल का नाम कुल्थी है, जो कि विश्व की सबसे पुरानी दाल है। इसमें पेट की पथरी को गलाने का माता है। इस दाल को हॉर्स ग्राम के नाम से भी जाना जाता है। इसका इतिहास गंगा बेसिन सभ्यता और वैदिक सभ्यता से भी पुराना है।
सुपर फूड
बता दें कि कुल्थी की दाल का सबसे अधिक सेवन सरस्वती रिवर सभ्यता के समय और हड़प्पा कालीन सभ्यता के समय किया जाता था। यह दाल स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी काफी ज्यादा फायदेमंद है। भारत में लगभग 10,000 सालों से यह दाल खाई जा रही है। इसके अवशेष कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में खुदाई के दौरान पाए गए हैं। साथ ही इसका उल्लेख वेदों में भी किया गया है। आयुर्वेद के अनुसार, यह एक सुपर फूड है। स्वास्थ्य के लिए खजाने से कम नहीं है।
इन राज्यों में होता है उत्पादन
भारत में कुल्थी दाल की खेती कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और हिमाचल प्रदेश में होती है। यहां से विश्व के कई देशों में इसका निर्यात भी होता है, जिसे लोग बड़े ही चावल से रोटी या फिर चावल के साथ खाते हैं।
सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.



