Wardrobing : क्या आप जानते हैं इस रिटर्न फ्रॉड के बारे में, जानिए दुनिया के मशहूर ब्रांड Diesel ने कैसे वार्डरोबिंग को बनाया मार्केटिंग कैंपेन

वार्डरोबिंग एक गंभीर समस्या है और ऑनलाइन शॉपिंग के समय में इसमें लगातार इज़ाफ़ा देखा जा रहा है। यही वजह है कि कई ब्रांड्स और रिटेलर्स ने इसके खिलाफ प्रभावी उपायों को अपनाया है। सख्त रिटर्न पॉलिसी, तकनीकी उपाय जैसे RFID टैग्स और बेहतर निगरानी प्रणाली इसे नियंत्रित करने में मदद कर रही हैं। इसके अलावा, ग्राहकों को जागरूक करना भी इस समस्या को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।
Wardrobing in online shopping

Understanding Wardrobing or Return Fraud : आप जानते हैं वार्डरोबिंग के बारे में सुना है। वार्डरोबिंग एक प्रकार की धोखाधड़ी है जिसमें ग्राहक किसी वस्तु को खरीदता है और उसे एक बार पहनने या उपयोग करने के बाद वापस कर देता है, यह दावा करते हुए कि वस्तु में कोई दोष है या वह उसकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरी है। आमतौर पर यह धोखाधड़ी फैशन उद्योग, खासकर कपड़े और जूते के साथ होती है। ऑनलाइन शॉपिंग में ये तरीका अब बेहद आम हो रहा है और इसे रिटर्न फ्रॉड (Return Fraud) भी कहा जाता है

कुछ लोग वार्डरोबिंग का सहारा इसलिए लेते हैं क्योंकि उन्हें यह तरीका बिना पैसे गँवाए प्रोडक्ट प्राप्त करने का आसान तरीका लगता है। वे एक बार कपड़े या जूते वगैहर पहनकर वापस कर देते हैं। कई बार ये भी होता है कि किसी खास मौके पर अच्छा दिखने के लिए लोग नए कपड़े खरीदते हैं, लेकिन बाद में उन्हें यह महसूस होता है कि उन्हें उस वस्तु की ज़रूरत नहीं थी और इसीलिए इस्तेमाल की हुई वस्तु को वापस कर देते हैं। वहीं कुछ लोग नई वस्तु खरीदने के बाद उसे पहनकर तात्कालिक खुशी और संतुष्टि महसूस करते हैं, लेकिन फिर जल्द ही उन्हें उसे वापिस करने की इच्छा होती है क्योंकि वह वस्तु अब उनके लिए उपयोगी नहीं रह जाती है।

ऑनलाइन शॉपिंग के दौर में बढ़ती Wardrobing

ऑनलाइन मार्केटिंग के दौरान वार्डरोबिंग के मामले ज्यादा बढ़ गए हैं। इसके पीछे ऑनलाइन स्टोर्स की Easy Return Policy होती है, जिस कारण उपभोक्ता बिना किसी परेशानी के उत्पादों को वापस कर सकते हैं। इससे कुछ लोग एक बार पहनने के बाद उत्पाद को वापस कर देते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान रिटर्न के लिए ग्राहक की पहचान और उद्देश्य की जांच करना मुश्किल होता है। इस कारण, कुछ लोग जानबूझकर उत्पाद खरीदते हैं उसे एक बार पहनकर वापस कर देते हैं। ऑनलाइन मार्केटिंग अक्सर विशेष ऑफर और छूट प्रदान करती है, जिससे ग्राहक एक बार उपयोग के बाद भी उन उत्पादों को वापस करने की आदत विकसित करते हैं, खासकर जब उन्हें उत्पाद के मूल्य के मुकाबले अच्छा सौदा मिलता है। वहीं, सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर की बढ़ता प्रभाव भी इसका एक कारण बनता जा रहा है। लोग फैशन के ट्रेंड्स को अपनाने के लिए कपड़े खरीदते हैं, लेकिन इन्हें पहनने के बाद या ट्रेंड बदलने पर इन्हें वापस कर देते हैं।

वार्डरोबिंग/रिटर्न फ्रॉड के नुकसान

यूएस में रिटेलर्स को हर साल वार्डरोबिंग के कारण लगभग 25 बिलियन का सालाना नुकसान होता है। इस तरह समझा जा सकता है कि ये कितनी बड़ी धोखाधड़ी है। इसीलिए कई देशों में दुकानदारों और ऑनलाइन रिटेलर्स ने इस प्रैक्टिस से बचने के लिए सख्त रिटर्न पॉलिसी और ट्रैकिंग सिस्टम अपनाए हैं।

  • आर्थिक नुकसान : वार्डरोबिंग के कारण, उत्पादों की बिक्री बढ़ने के बावजूद वास्तविक मुनाफा कम हो सकता है, क्योंकि बहुत सारे ग्राहक उत्पाद खरीदने के बाद उसे सिर्फ एक बार पहनकर वापस कर देते हैं। इसका परिणाम होता है कि व्यापारी को स्टॉक के दोबारा विक्रय या पुनर्निर्माण पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।
  • इन्क्रिमेंटल रिटर्न्स: जब एक उत्पाद को बार-बार रिटर्न किया जाता है तो व्यवसायी को उसे दुबारा बेचने के लिए उसे फिर से जाँचना पड़ता है, पैकिंग करनी पड़ती है और अक्सर उसे फिर से विक्रय योग्य बनाने के लिए उसे डिस्काउंट पर बेचना पड़ता है। इस प्रक्रिया में समय और संसाधन की बर्बादी होती है।
  • ब्रांड इमेज पर असर: यदि वार्डरोबिंग की घटनाएं ज्यादा होती हैं तो इससे व्यवसाय की ब्रांड इमेज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ग्राहक यह महसूस कर सकते हैं कि उत्पाद की गुणवत्ता या स्टाइल उम्मीदों के अनुसार नहीं है, जिससे ग्राहकों का विश्वास घट सकता है।
  • निगेटिव कैश फ्लो: वार्डरोबिंग के कारण व्यवसाय को तुरंत भुगतान मिल जाता है, लेकिन उत्पाद वापस होने के बाद उसे फिर से बेचने की प्रक्रिया में समय लगता है। इस कारण बिज़नेस का कैश फ्लो प्रभावित हो सकता है।
  • मार्केटिंग पर अतिरिक्त खर्च: जब उत्पाद वापस होते हैं तो कंपनियों को उन्हें फिर से बेचना होता है, जिसके लिए मार्केटिंग, पैकिंग और शिपिंग में अतिरिक्त खर्च आता है। यह लागत व्यवसाय के लाभ पर असर डाल सकती है।

वार्डरोबिंग को रोकने के लिए कंपनियों द्वारा अपनाए गए तरीके

वार्डरोबिंग रोकने के लिए कई ब्रांड्स और फैशन कंपनियों ने कई प्रभावी तरीके अपनाए हैं। यह धोखाधड़ी उनके लिए वित्तीय नुकसान और ब्रांड की छवि को प्रभावित करने का कारण बन सकती है, इसलिए इसे रोकने के लिए विभिन्न नीतियां और तकनीकी उपाय लागू किए जा रहे हैं।

1. सख्त रिटर्न पॉलिसी: कई ब्रांड्स और रिटेलर्स ने अपनी रिटर्न पॉलिसी को सख्त किया है ताकि वार्डरोबिंग को रोका जा सके।
2. टाइम लिमिट: अब कई कंपनियां कपड़ों को वापस करने के लिए एक सख्त समय सीमा लागू करती हैं, जैसे 30 दिनों के भीतर ही रिटर्न स्वीकार करना।
3. डिफेक्टेड आइटम की ही वापसी: कई दुकानों ने यह नीति अपनाई है कि सिर्फ डिफेक्टेट या गलत आइटम ही वापस किए जा सकते हैं, जबकि सामान्य वस्त्रों को वापस नहीं लिया जाएगा।
4. सुरक्षा टैग्स और स्टीकर्स: कई ब्रांड्स ने सुरक्षा टैग्स या चिप्स का उपयोग शुरू किया है, जो वस्त्रों पर लगाए जाते हैं। चिप्स और RFID टैग्स न सिर्फ चोरी को रोकने में मदद करते हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करते हैं कि कपड़ों का उपयोग नहीं किया गया है और यदि वापसी की जाती है तो उसकी स्थिति को ट्रैक किया जा सकता है।
5. ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम: कई कंपनियां अब उपभोक्ता के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स जैसे कि इंस्टाग्राम आदि पर भी नज़र रखने लगी है। ये कड़ी ट्रैकिंग और जांच प्रक्रिया होती है, जो यह सुनिश्चित करती है कि धोखाधड़ी ना हो।
6. कस्टमर लॉयल्टी प्रोग्राम्स: कुछ ब्रांड्स ने कस्टमर लॉयल्टी प्रोग्राम्स को पेश किया है, जिससे वे अपने ग्राहकों के व्यवहार को ट्रैक कर सकते हैं।

 Diesel Brand और वार्डरोबिंग : अपोज़िट स्ट्रेटजी

आपदा में अवसर..ये बात हमने कई बार देखी-सुनी है। इस उदाहरण को इसी संदर्भ में देखा जा सकता है। वार्डरोबिंग की समस्या से जहां अधिकांश ब्रांड्स और कंपनियां परेशान रही, वहीं दुनिया के मशहूर ब्रांड डीज़ल (Diesel) ने इसे लेकर ऐसी स्ट्रेटजी अपनाई जो मिसाल बन गई। डीज़ल ने सोचा कि वार्डरोबिंग जैसी मानसिकता का ब्रांड की बिक्री और कस्टमर एंगेजमेंट के लिए उपयोग हो सकता है। इसीलिए उसने वार्डरोबिंग को एक मार्केटिंग टूल के रूप में अपनाया और साल 2019 में कैंपेन “एंजॉय बिफोर रिटर्निंग” (Enjoy Before Returning) चलाया। इसके तहत उसने अपनी रिटर्न पॉलिसी में कुछ बदलाव किए और यह सुनिश्चित किया कि ग्राहक एक बार कपड़े पहनने के बाद भी उन्हें बिना किसी परेशानी के वापस कर सकता है। डीज़ल के ग्राहकों के लिए विशेष रूप से उनकी दुकानों और ऑनलाइन शॉप्स पर एक नई और ईज़ी रिटर्न पॉलिसी पेश की गई, जो उनकी खरीदारी को आसान और पारदर्शी बनाती थी। ये कैंपेन ब्रांड के लिए बेहद लाभकारी साबित हुआ। इससे न सिर्फ उनकी बिक्री में बढ़ोत्तरी हुई बल्कि रिटर्न में भी कमी देखी गई।

डीज़ल का उद्देश्य अपने ग्राहकों को ऐसा अनुभव प्रदान करना था जिससे वे महसूस करें कि वे भी फैशन की दुनिया में शामिल हैं। ब्रांड ने यह संदेश दिया कि वार्डरोबिंग से वे अधिक से अधिक फैशन का हिस्सा बन सकते हैं और उन्हें हर खास मौके के लिए नए आउटफिट्स पहनने का अवसर मिलता है। इसने कस्टमर्स को अपने खुद के “पार्टी या इवेंट आउटफिट्स” के रूप में वस्त्रों का उपयोग करने और फिर उन्हें वापस करने की सुविधा दी। डीज़ल ने अपने उत्पादों के साथ सोशल मीडिया पर सक्रिय रूप से जुड़ने का प्रयास किया। ग्राहकों को यह मौका दिया गया कि वे डीज़ल के कपड़े पहनकर इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि पर पोस्ट करें और फिर उन पोस्ट्स को ब्रांड के विज्ञापन या मार्केटिंग में इस्तेमाल किया गया। इससे न केवल ग्राहकों की भागीदारी बढ़ी, बल्कि यह ग्राहकों को बार-बार खरीदारी करने के लिए प्रेरित करता था, क्योंकि उन्हें लगता था कि वे “कूल और स्टाइलिश” दिख रहे हैं।

इस विपरीत रणनीति के कारण डीज़ल ने कुछ सकारात्मक बदलाव अनुभव किए और इससे रिटर्न में भी कमी आई। जब ग्राहकों को यह अनुभव मिला कि वे एक बार उपयोग करने के बाद भी उत्पाद वापस कर सकते हैं, तो उन्होंने अधिक भरोसे के साथ खरीदारी की। इससे ब्रांड की बिक्री में वृद्धि हुई क्योंकि ग्राहक नए फैशन ट्रेंड्स को अपनाने के लिए ज्यादा प्रेरित हुए। डीज़ल ने ग्राहकों को समझाया कि फैशन सिर्फ पहनने का नहीं, बल्कि हर खरीदारी अपने आप में एक अनुभव होती है। इस तरह डीज़ल ने अपनी स्ट्रेटजी को बदलकर वार्डरोबिंग को एक मार्केटिंग टूल के रूप में अपनाया, जो ब्रांड के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुआ।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
Shruty Kushwaha

पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J.), 2001. 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल और लाइव इंडिया मुंबई में कार्य.

2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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