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असम-MP के बीच ऐतिहासिक वन्यजीव समझौता: असम से आएंगे जंगली भैंसे-गैंडे, बदले में भेजे जाएंगे टाइगर और मगरमच्छ

Written by:Bhawna Choubey
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असम और मध्य प्रदेश के बीच वन्य जीव संरक्षण को लेकर बड़ा फैसला हुआ है। मुख्यमंत्री स्तर की बैठक के बाद तय हुआ कि असम से जंगली भैंसे और गैंडे MP लाए जाएंगे, जबकि MP से टाइगर और मगरमच्छ असम भेजे जाएंगे।
असम-MP के बीच ऐतिहासिक वन्यजीव समझौता: असम से आएंगे जंगली भैंसे-गैंडे, बदले में भेजे जाएंगे टाइगर और मगरमच्छ

भारत में वन्य जीव संरक्षण को लेकर एक नई और बड़ी पहल की शुरुआत होने जा रही है। असम और मध्य प्रदेश, दो ऐसे राज्य जो अपनी जैव विविधता के लिए जाने जाते हैं, अब आपस में वन्य जीवों का आदान-प्रदान करेंगे। इस फैसले के बाद असम से मध्य प्रदेश में जंगली भैंसे और गैंडे लाए जाएंगे, जबकि मध्य प्रदेश से टाइगर और मगरमच्छ असम भेजे जाएंगे। यह सिर्फ जानवरों की अदला-बदली नहीं, बल्कि देश में वन्य जीव संरक्षण को नए स्तर पर ले जाने की योजना है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के बीच हुई बैठक के बाद इस पर सहमति बनी है, जिससे दोनों राज्यों की जैव विविधता को मजबूती मिलेगी।

असम एमपी वाइल्डलाइफ एक्सचेंज पर कैसे बनी सहमति

मुख्यमंत्री मोहन यादव गुरुवार को असम के प्रवास पर थे। इस दौरान उनकी मुलाकात असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा से हुई। दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच वन्य जीव संरक्षण को लेकर लंबी और सार्थक बातचीत हुई। इसी बैठक में असम एमपी वाइल्डलाइफ एक्सचेंज योजना पर अंतिम सहमति बनी। इस मुद्दे पर पहले से चर्चा चल रही थी, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर अंतिम फैसला नहीं हो पा रहा था। मुख्यमंत्री स्तर की बातचीत के बाद अब इस योजना को हरी झंडी मिल गई है। दोनों राज्यों के वन विभाग और विशेषज्ञ संस्थानों को आगे की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए जाएंगे।

असम से MP क्यों आएंगे जंगली भैंसे और गैंडे

जंगली भैंसे और एक सींग वाले गैंडे भारत में सीमित इलाकों में ही पाए जाते हैं। वर्तमान समय में जंगली भैंसों की प्रमुख आबादी असम तक ही सीमित रह गई है। मध्य प्रदेश में यह प्रजाति कई साल पहले पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। वन्य जीव संरक्षण की आधुनिक सोच सिर्फ किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रहती। अगर किसी प्रजाति की आबादी एक ही जगह सिमट जाए, तो बीमारी, प्राकृतिक आपदा या मानव हस्तक्षेप से उसके खत्म होने का खतरा बढ़ जाता है। इसी वजह से जंगली भैंसों और गैंडों को नए, सुरक्षित और अनुकूल इलाकों में बसाने की जरूरत महसूस की गई।

कान्हा टाइगर रिजर्व क्यों माना गया सबसे उपयुक्त

देहरादून स्थित भारतीय वन्य जीव संस्थान (WII) और अन्य कई वैज्ञानिक अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि मध्य प्रदेश का कान्हा टाइगर रिजर्व जंगली भैंसों के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। यहां की खास बातें साफ हैं घास के मैदान बड़े और पोषक हैं, जंगलों में पानी की पर्याप्त उपलब्धता है, मानव हस्तक्षेप बहुत कम है, अन्य शाकाहारी जीवों का दबाव सीमित है। यही कारण है कि वर्षों से कान्हा में जंगली भैंसों को फिर से बसाने की बात चल रही थी। अब असम एमपी वाइल्डलाइफ एक्सचेंज के तहत इस योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी होगी।

MP से असम क्यों जाएंगे टाइगर और मगरमच्छ

मध्य प्रदेश को देश का टाइगर स्टेट कहा जाता है। यहां टाइगरों की संख्या लगातार बढ़ी है। इसके साथ ही मगरमच्छ संरक्षण में भी MP ने अच्छी सफलता हासिल की है। कई नदियों और अभयारण्यों में मगरमच्छों की संख्या संतुलित स्तर से अधिक हो रही है। असम में टाइगर और मगरमच्छों के लिए उपयुक्त जंगल और जल क्षेत्र मौजूद हैं, लेकिन वहां इनकी संख्या अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में MP से असम टाइगर और मगरमच्छ भेजे जाएंगे, ताकि वहां के जंगलों में पारिस्थितिकी संतुलन मजबूत हो सके।

चीता प्रोजेक्ट से मिला भरोसा

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस दौरान कहा कि जिस तरह मध्य प्रदेश में चीता पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया गया, उसी तरह जंगली भैंसों की वापसी भी वन्य जीव संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगी। चीता प्रोजेक्ट ने MP को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। अब असम एमपी वाइल्डलाइफ एक्सचेंज के जरिए MP एक बार फिर वन्य जीव संरक्षण में नेतृत्व की भूमिका निभाने जा रहा है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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