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Fri, Jan 9, 2026

MP में बनेगा 625 KM लंबा टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर, 5 हजार करोड़ की होगी लागत

Written by:Bhawna Choubey
Published:
मध्य प्रदेश में वन्यजीव पर्यटन को नई पहचान मिलने जा रही है। 5 हजार करोड़ की लागत से बनने वाला 625 किलोमीटर लंबा टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ और पन्ना को जोड़ेगा, जिससे पर्यटन, रोजगार और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी।
MP में बनेगा 625 KM लंबा टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर, 5 हजार करोड़ की होगी लागत

मध्य प्रदेश, जिसे देश का टाइगर स्टेट कहा जाता है, अब वन्यजीव पर्यटन के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। प्रदेश में 5 हजार करोड़ रुपये की लागत से 625 किलोमीटर लंबा टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की है। यह कॉरिडोर प्रदेश के प्रमुख टाइगर रिजर्व को आधुनिक सड़क नेटवर्क के जरिए आपस में जोड़ेगा और पर्यटकों के लिए सफर को आसान बनाएगा।

पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश में टाइगरों की संख्या लगातार बढ़ी है। इसी पहचान को और मजबूत करने के लिए सरकार अब पर्यटन के साथ-साथ आवागमन और व्यापार को भी बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर सिर्फ जंगलों को जोड़ने की योजना नहीं है, बल्कि यह पूरे इलाके के विकास का रास्ता खोलने वाला प्रोजेक्ट माना जा रहा है।

पेंच से पन्ना तक जुड़ेगा टाइगर स्टेट का दिल

इस टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर के तहत पेंच टाइगर रिजर्व को कान्हा से, कान्हा को बांधवगढ़ से और बांधवगढ़ को पन्ना टाइगर रिजर्व से जोड़ा जाएगा। कुल मिलाकर यह कॉरिडोर 625 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें आधुनिक सड़कें विकसित की जाएंगी। इससे पर्यटकों को एक टाइगर रिजर्व से दूसरे रिजर्व तक जाने में कम समय लगेगा और सफर भी सुरक्षित रहेगा। अभी इन टाइगर रिजर्व के बीच यात्रा करने में काफी समय और परेशानी होती है। कई जगहों पर सड़कें खराब हैं और सीधी कनेक्टिविटी नहीं है। नए टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर के बनने से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। इससे देश और विदेश से आने वाले पर्यटक एक ही ट्रिप में कई नेशनल पार्क घूम सकेंगे।

टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर से पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

मध्य प्रदेश का वन्यजीव पर्यटन पहले से ही देश में खास पहचान रखता है। कान्हा, पेंच, बांधवगढ़ और पन्ना जैसे टाइगर रिजर्व हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। अब टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर बनने के बाद इनकी लोकप्रियता और बढ़ने की उम्मीद है। जब सड़कें अच्छी होंगी और सफर आसान होगा, तो ज्यादा पर्यटक यहां आना पसंद करेंगे। इससे होटल, रिसॉर्ट, गाइड, टैक्सी चालक और स्थानीय व्यापारियों को सीधा फायदा मिलेगा। गांवों और कस्बों में छोटे-छोटे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। पर्यटन से जुड़ी गतिविधियां बढ़ेंगी और स्थानीय लोगों की आमदनी में इजाफा होगा।

सिर्फ पर्यटन नहीं, व्यापार और उद्योग को भी फायदा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ कहा है कि यह कॉरिडोर केवल टाइगर टूरिज्म तक सीमित नहीं रहेगा। इसका उपयोग व्यापारिक और अन्य जरूरी गतिविधियों के लिए भी किया जाएगा। सड़क उन्नयन से माल परिवहन आसान होगा और दूर-दराज के इलाकों को बड़े बाजारों से जोड़ा जा सकेगा। कई वन क्षेत्र ऐसे हैं, जहां संसाधन तो हैं, लेकिन सही सड़क कनेक्टिविटी न होने से विकास रुक जाता है। टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर के जरिए इन क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। छोटे उद्योग, कृषि उत्पाद और हस्तशिल्प को नए बाजार मिलेंगे। इससे पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

टाइगर स्टेट की पहचान को मिलेगा नया आयाम

मध्य प्रदेश देश में सबसे ज्यादा बाघों वाला राज्य है। यह पहचान अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। अब टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर के जरिए इस पहचान को और मजबूत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में तैयार की गई है, ताकि प्रदेश के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों को एक सुव्यवस्थित नेटवर्क से जोड़ा जा सके। जब एक राज्य अपनी प्राकृतिक संपदा को सही तरीके से पेश करता है, तो वह न सिर्फ पर्यटन में आगे बढ़ता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाता है। टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर मध्य प्रदेश को ग्लोबल टूरिज्म मैप पर और मजबूत जगह दिला सकता है।

अटल प्रगति पथ से चंबल क्षेत्र को नई रफ्तार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर के साथ-साथ अटल प्रगति पथ की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ग्वालियर, भिंड, श्योपुर सहित पूरे चंबल क्षेत्र को इस पथ का लाभ मिलेगा। करीब 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला अटल प्रगति पथ उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर को जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। यह बड़ी बात है कि इस पथ के शुरू होने से मध्य प्रदेश से दिल्ली-एनसीआर की दूरी घटकर सिर्फ तीन से चार घंटे रह जाएगी। इससे व्यापार, निवेश और आवागमन को जबरदस्त फायदा मिलेगा। चंबल क्षेत्र, जिसे लंबे समय तक पिछड़ा माना गया, अब विकास की मुख्यधारा में शामिल हो सकेगा।

भोपाल-जबलपुर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे पर भी जोर

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि 9716 करोड़ रुपये की लागत से भोपाल-जबलपुर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा भोपाल-इंदौर-प्रयागराज, जबलपुर-नागपुर और इंदौर-धुले-पुणे सड़क परियोजनाएं भी तेजी से आगे बढ़ाई जाएंगी। इन सड़क परियोजनाओं का सीधा असर टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर पर भी पड़ेगा। जब प्रदेश के चारों दिशाओं में मजबूत सड़क नेटवर्क होगा, तो पर्यटन और उद्योग दोनों को फायदा मिलेगा। हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के साथ हुई बैठक में इन परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई है।