Indore News: परिजनों की आशंका हुई सच साबित, दोस्त ही निकला कातिल

Indore News: परिजनों की आशंका हुई सच साबित, दोस्त ही निकला कातिल

इंदौर, आकाश धौलपुरे। इंदौर में निर्माणाधीन इमारत में मजदूरी का काम करने आये बैतूल निवासी युवक की मौत (Death) से  पर्दा उठ गया है। मौत सामान्य नहीं थी परिजनों ने घटना के बाद हत्या (Murder) की आशंका जताई थी और परिजनों की आशंका सच साबित हुई।  मृतक तुषार को उसके ही मजदूर साथी ने मामूली बात पर धक्का दे दिया था जिससे बिल्डिंग से नीचे गिरने पर तुषार की मौत हो गई थी।

गौरतलब है कि तुषार और उसके कई दोस्त उसके गांव से इंदौर में मजदूरी पर काम करने के लिए आये थे और यहां वो एम आर10 ब्रिज के समीप एक निर्माणाधीन बिल्डिंग में मजदूरी का काम करते है। पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर तुषार की मौत को संदिग्ध मानकर जांच शुरू की थी। पुलिस की तफ्तीश के दौरान ये बात सामने आई कि सभी मिलकर सोमवार को खाना खा रहे तब ही पानी लाने की मामूली बात को लेकर तुषार की कहासुनी सुजान नामक दोस्त से हो गई। बात इतनी बढ़ गई नौबत हाथापाई तक पहुंच गई और इसी दौरान सुजान ने तुषार को धक्का दे दिया। जिससे तुषार की मौत हो गई।

ये भी पढ़ें – एक्शन मोड में सीएम शिवराज, मास्क लगाने को लेकर दी समझाइश, प्रतिबंध पर कही ये बातें

हीरा नगर थाना प्रभारी अभय नेमा ने बताया कि तुषार नामक युवक की उम्र करीब 20 वर्ष थी और वह मजदूर था। वो निर्माणाधीन मल्टी में कार्य कर रहा था। वह अपने साथियों के साथ सोमवार रात को खाना खा चुका था उसके बाद पानी को लेकर उसका विवाद उसके दोस्त सुजान मंडल के साथ हुआ था। दोनों का झगड़ा सामान्य रूप से चल रहा था और झगड़ा होने के साथ तुषार बेसमेंट में गिर गया और सिर में चोंट लगने की वजह से उसकी मौत हो गई। चूंकि आरोपी उसका दोस्त था और पानी को लेकर झगड़ा हुआ था। हाथापाई हुई थी और धक्का देने से उसकी मौत हुईं है। लिहाजा सुजान पर 302 के तहत हत्या (Murder) का प्रकरण पंजीबद्ध किया गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

पानी को लेकर मामूली बात पर हुए विवाद का अंत दर्दनाक हुआ है और अब न तो जिससे झगड़ा हुआ है वो दोस्त दुनिया मे रहा और झगड़ा करने वाला दोस्त सलांखो के पीछे है। ऐसे में ये बात साफ है कि पलभर का गुस्सा पूरा जीवन बदल देता है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
Atul Saxena

पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
Follow Us :GoogleNews