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तीज के दिन गणपति की स्थापना! हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का अद्भुत संयोग

इस बार तीज व्रत-पूजन के साथ गणपति आराधना का भी संयोग रहेगा। तीज और चतुर्थी एक ही दिन पड़ने से पर्व का महत्व बढ़ गया है, जानें शुभ मुहूर्त।
तीज के दिन गणपति की स्थापना! हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का अद्भुत संयोग

मध्य प्रदेश में 14 सितंबर को इस बार हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन मनाई जाएगी। तृतीया युक्त चतुर्थी का यह संयोग धार्मिक रूप से खास माना जा रहा है।

हरतालिका तीज पर महिलाएं व्रत और पूजा कर सुखी वैवाहिक जीवन, पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना करेंगी। वहीं, इसी दिन से 10 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत होगी। घरों और पंडालों में भगवान गणेश की स्थापना के साथ अगले 10 दिनों तक पूजा-अर्चना का दौर चलेगा।

14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का संयोग

इस बार 14 सितंबर का दिन धार्मिक रूप से काफी महत्वपूर्ण रहेगा। एक ही दिन हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी होने से सुबह से ही घरों में पूजा-पाठ का माहौल रहेगा। हरतालिका तीज मुख्य रूप से महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था।

गणेश चतुर्थी पर सुबह 11.30 बजे गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापना को विशेष महत्व दिया जाता है। 14 सितंबर को पार्थिव गणेश की स्थापना का शुभ समय सुबह 11.30 बजे रहेगा। इस दौरान मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा की स्थापना कर पूजा की जा सकती है। इस बार गणेश स्थापना ब्रह्म योग में होने की बात बताई गई है। धार्मिक मान्यता में ब्रह्म योग को शुभ माना जाता है।

गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से क्यों बचते हैं?

गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने से बचने की धार्मिक मान्यता भी है। इसके पीछे भगवान गणेश से जुड़ी एक पौराणिक कथा बताई जाती है। मान्यता के अनुसार, गणेशजी ने चंद्रमा को अहंकार के कारण शाप दिया था। इसी वजह से गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन को शुभ नहीं माना जाता।

10 दिनों में गणेशजी के 10 नामों की साधना

गणेशोत्सव के 10 दिनों को भगवान गणेश की साधना के लिए विशेष माना जाता है। धर्मशास्त्रीय मान्यता के अनुसार, इन दिनों गणेशजी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जा सकती है। भक्त प्रतिदिन भगवान गणेश को 21 दूर्वा और मोदक अर्पित करते हुए उनके 10 नामों का क्रम से जाप कर सकते हैं। इन नामों में गणाधिप, उमापुत्र, अघनाशन, विनायक, ईशपुत्र, सर्वसिद्धिप्रदायक, एकदंत, इभवक्र, मूषकवाहन और कुमारगुरु शामिल हैं।

Disclaimer: इस खबर में दिए गए शुभ मुहूर्त, धार्मिक मान्यताएं और पूजा से जुड़ी जानकारी विभिन्न धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News नहीं करता। पूजा या किसी धार्मिक अनुष्ठान से पहले संबंधित विशेषज्ञ या विद्वान से सलाह लें।

Bhawna Choubey
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पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। तथ्यों की पड़ताल, महत्वपूर्ण मुद्दों को समझना और निष्पक्ष खबरों के जरिए लोगों की आवाज़ बनना मेरी पत्रकारिता की पहचान है। View all posts by Bhawna Choubey →
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