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केन-बेतवा परियोजना को मिली रफ्तार, MP के तीन जिलों को मिलेगा सिंचाई का पानी

Written by:Bhawna Choubey
Published:
बुंदेलखंड के सूखे से जूझ रहे इलाकों के लिए राहत की खबर सामने आई है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत ढोड़न बांध का निर्माण शुरू हो गया है, जिससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सिंचाई और पेयजल की समस्या कम होने की उम्मीद बढ़ गई है।
केन-बेतवा परियोजना को मिली रफ्तार, MP के तीन जिलों को मिलेगा सिंचाई का पानी

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके के किसान सालों से पानी की कमी से जूझते रहे हैं। कई गांवों में खेती बारिश पर निर्भर रही, जिससे हर साल फसल का जोखिम बना रहता था। लेकिन अब इस क्षेत्र के लिए एक बड़ी उम्मीद की खबर सामने आई है।

केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत बनने वाले ढोड़न बांध का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इस परियोजना के पूरा होने से सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और किसानों को खेती के लिए भरोसेमंद पानी मिलने लगेगा। यह खबर खासतौर पर उन किसानों के लिए राहत लेकर आई है, जो लंबे समय से पानी की समस्या से परेशान थे।

केन-बेतवा लिंक परियोजना क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?

केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की बड़ी नदी जोड़ो योजनाओं में से एक मानी जाती है। इसका मकसद केन नदी के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी में पहुंचाना है ताकि सूखे इलाकों को पानी मिल सके। यह परियोजना मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए जीवन रेखा मानी जा रही है। यहां कई जिलों में खेती पानी की कमी से प्रभावित होती रही है। परियोजना के पूरा होने के बाद न सिर्फ सिंचाई, बल्कि पेयजल और पर्यावरण संतुलन पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।

ढोड़न बांध से किन जिलों को होगा फायदा?

ढोड़न बांध के निर्माण का सबसे ज्यादा फायदा मध्य प्रदेश के तीन जिलों को मिलने वाला है। इनमें टीकमगढ़, निवाड़ी और छतरपुर जिले शामिल हैं। इन जिलों के हजारों किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा। इससे खेती का रकबा बढ़ेगा और फसल उत्पादन में भी सुधार आएगा। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के झांसी, बांदा और महोबा जिलों को भी इस परियोजना का लाभ मिलेगा। यानी दोनों राज्यों के बुंदेलखंड क्षेत्र के किसानों को इस योजना से राहत मिलने वाली है।

छतरपुर जिले में बन रहा है मुख्य बांध

ढोड़न बांध का निर्माण केन नदी पर किया जा रहा है और यह बांध मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बन रहा है। यह बांध करीब 77 मीटर ऊंचा और लगभग 2 किलोमीटर से ज्यादा लंबा होगा। इसे केन-बेतवा लिंक परियोजना का मुख्य हिस्सा माना जा रहा है। इसका निर्माण जल शक्ति मंत्रालय की देखरेख में किया जा रहा है। निर्माण कार्य शुरू होने से उम्मीद है कि आने वाले कुछ वर्षों में क्षेत्र में पानी की स्थिति काफी सुधर सकती है।

किसानों के लिए कैसे बदलेगी स्थिति?

बुंदेलखंड क्षेत्र में किसान अक्सर बारिश पर निर्भर रहते हैं। अगर बारिश कम हुई तो फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। ढोड़न बांध बनने के बाद सिंचाई के लिए स्थायी पानी उपलब्ध होगा। इससे किसान साल में एक की बजाय दो या तीन फसलें भी उगा सकेंगे। पानी मिलने से खेती का खर्च कम होगा और किसानों की आय बढ़ने की संभावना भी मजबूत होगी।

स्थानीय लोगों को भी मिलेगा फायदा

सिर्फ किसानों को ही नहीं, बल्कि बांध बनने से आसपास के इलाकों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय लोगों को काम मिल रहा है और आगे चलकर पर्यटन व अन्य गतिविधियों से भी आय बढ़ने की संभावना है। पानी उपलब्ध होने से गांवों में जीवन स्तर भी बेहतर हो सकता है।

बुंदेलखंड में क्यों जरूरी थी यह परियोजना?

बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से सूखे और पानी की कमी के लिए जाना जाता रहा है। यहां कई बार खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर रहती है। पानी की कमी के कारण कई किसानों को खेती छोड़कर दूसरे कामों की तलाश में पलायन करना पड़ा। ऐसे में केन-बेतवा लिंक परियोजना को इस क्षेत्र की सबसे बड़ी उम्मीद माना जा रहा है।