वैदिक ज्योतिष के अनुसार, साल 2026 का पहला चंद्रग्रहण 3 मार्च 2026 को फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर लगेगा। इस दौरान मन के कारक चंद्रमा सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में रहेंगे। यह ग्रहण भारत के साथ साथ एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका जैसे कई देशों में भी दिखाई देगा। चूंकि भारत (जैसे अरुणाचल प्रदेश, मप्र, दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश, असम, मणिपुर, मिजोरम नागालैंड, असम, आइजोल, गुवाहाटी समेत कई देश के जिलों में दिखाई देगा) में यह ग्रहण दिखेगा, इसलिए सूतक काल भी मान्य होगा।
चंद्रग्रहण का समय
- चंद्र ग्रहण की शुरुआत दोपहर 2 बजकर 16 मिनट से होगी। मुख्य प्रभाव दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से दिखाई देगा। शाम 6 बजकर 46 मिनट पर चंद्रमा ग्रहण से बाहर आने लगेगा। चंद्र ग्रहण पूरी तरह शाम 7 बजकर 52 मिनट पर समाप्त हो जाएगा।
- सूतक सुबह 9 बजकर 39 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। चंद्रग्रहण लगने के 9 घंटे पहले ही सूतक लग जाता है।
- यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) होगा, जिसे ‘ब्लड मून’ भी कहा जा सकता है। बता दें कि हिंदू पंचाग के अनुसार, 3 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को होली (रंग पर्व) खेली जाएगी, ऐसे में इस ग्रहण का महत्व और बढ़ जाता है।
महत्वपूर्ण जानकारी
- चंद्रग्रहण की तारीख: 3 मार्च 2026, मंगलवार
- चंद्रग्रहण का आरंभ समय: दोपहर 2:16 PM (लगभग)
- चंद्रग्रहण का समापन: शाम 7:52 PM (लगभग)
- सूतक का समय: 3 मार्च को सुबह लगभग 6:20 AM से
- भारत में दिखने का समय (चंद्रोदय) : शाम 06:26 बजे, अधिकतम ग्रहण : शाम 06:33 बजे से शाम 06:40 बजे तक, ग्रहण समाप्त : शाम 06:46 बजे
जानिए कब लगता है चंद्रग्रहण
- चंद्रग्रहण के दौरान सूर्य की परिक्रमा के दौरान पृथ्वी, चांद और सूर्य के बीच आ जाती है, इस दौरान चांद धरती की छाया से पूरी तरह से छुप जाता है।
- पूर्ण चंद्रग्रहण के दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक दूसरे के बिल्कुल सीध में होते हैं। इस दौरान जब हम धरती से चांद देखते हैं तो वह हमें काला नजर आता है और इसे चंद्रग्रहण कहा जाता है।
- आंशिक चंद्रग्रहण के दौरान सिर्फ चांद का एक भाग पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है। चंद्रमा के धरती की तरफ वाले हिस्से पर धरती की छाया काली दिखाई देती है, कटा हिस्सा दिखाई देता है, तो वह इस पर निर्भर करता है कि किस प्रकार सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में हैं।
राशियों पर कैसा रहेगा प्रभाव
धनु, मेष, सिंह और मकर राशि वालों के लिए चंद्रग्रहण लाभप्रद सिद्ध हो सकता है। इस अवधि में कोई वाहन या प्रापर्टी खरीदने के योग बन सकते हैं। आय, साहस और पराक्रम में वृद्धि के प्रबल संकेत हैं। नौकरीपेशा को वेतनवृद्धि के साथ पदोन्नति का लाभ मिल सकता है।। देश- विदेश की यात्रा कर सकते हैं। समाज में मान- सम्मान और प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी। व्यापारियों को अच्छा धनलाभ हो सकता है। परिवार में सुख-शांति और सकारात्मक माहौल बना रहेगा।
ग्रहण में क्या करें और क्या नहीं?
- ग्रहण के सूतक काल में पूजा पाठ बंद कर देना चाहिए।
- ग्रहण के अवधि के दौरान घर के पूजा वाले स्थान को पर्दे से ढक दें।
- ग्रहण में भूलकर भी देवी-देवताओं की पूजा नहीं करना चाहिए।
- ग्रहण के दौरान खाना-पीना नही चाहिए।
- खाद्य पदार्थों में तुलसी के पत्ते डालकर रखना चाहिए
- ग्रहण की समाप्ति के बाद घर और पूजा स्थल को गंगाजल का छिड़काव करके शुद्ध करना चाहिए।
- गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, उन्हें घर से
बाहर नहीं निकलना चाहिए और न ही ग्रहण देखना चाहिए। - ग्रहण के सूतक काल में भोजन बनाना, खाना, सोना, बाल काटना, तेल लगाना,
सिलाई-कढ़ाई करना और चाकू चलाना नहीं चाहिए।
(Disclaimer : यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों और जानकारियों पर आधारित है, MP BREAKING NEWS किसी भी तरह की मान्यता-जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इन पर अमल लाने से पहले अपने ज्योतिषाचार्य या पंडित से संपर्क करें)





