भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस के अटेर से विधायक हेमंत कटारे ने विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष के पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह घटनाक्रम विधानसभा के महत्वपूर्ण बजट सत्र के दौरान हुआ है, जिसने कई सियासी सवालों को जन्म दे दिया है। कटारे ने अपने इस्तीफे के लिए पारिवारिक दायित्वों और क्षेत्र को समय न दे पाने को कारण बताया है, लेकिन इस पर भाजपा के पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया की एक टिप्पणी ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।
सिसोदिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट के जरिए कांग्रेस की आंतरिक व्यवस्था पर सीधे सवाल उठाए हैं। उन्होंने इशारों में कहा कि कटारे के इस्तीफे की असली वजह सम्मान और प्रोटोकॉल की कमी है।
क्या सिर्फ पद काफी है?
पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने अपनी टिप्पणी में कांग्रेस के नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ पद देना ही काफी नहीं होता, पद के साथ सम्मान और महत्व भी मिलना चाहिए। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को नेता प्रतिपक्ष की कार्यशैली से जोड़ा।
“उप नेता का पद ही पर्याप्त नहीं होता। पद पाने वाले को मान-सम्मान और प्रोटोकॉल भी चाहिए। सत्र के दौरान उपनेता की उपस्थिति भी दिखनी चाहिए। सब कुछ नेता प्रतिपक्ष के इर्द-गिर्द ही नहीं होना चाहिए। अन्यथा उपनेता मजबूरी में यह कहकर पद छोड़ देता है कि परिवार और क्षेत्र को समय नहीं दे पा रहा हूं।” — यशपाल सिंह सिसोदिया, पूर्व विधायक
इस्तीफे का घटनाक्रम और कांग्रेस का पक्ष
जानकारी के मुताबिक, हेमंत कटारे ने अपना इस्तीफा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को भेजा है। दिलचस्प बात यह है कि इस्तीफे की खबर आने से पहले कटारे विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हुए थे, लेकिन फिर अचानक सदन से बाहर चले गए। इसके बाद उनका मोबाइल फोन भी बंद आने लगा।
शाम होते-होते मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस्तीफे की खबर की पुष्टि की। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि कटारे ने सिर्फ पद से इस्तीफा दिया है, वे कांग्रेस के प्राथमिक सदस्य बने रहेंगे। हालांकि, उनके इस्तीफे पर अंतिम निर्णय पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करेगा। इस पूरे मामले ने कांग्रेस के भीतर पद, सम्मान और वरिष्ठता को लेकर एक नई चर्चा शुरू कर दी है।
“उप नेता का पद ही पर्याप्त नहीं है”, पद प्राप्त करने वाले को मान-सम्मान और प्रोटोकॉल भी चाहिए, सत्र के दौरान उप नेता की उपस्थिति भी दिखाई देना चाहिए, सब कुछ नेता प्रतिपक्ष के इर्द- गिर्द ही नहीं होना चाहिए, अन्यथा उपनेता को यह बहाना कर के कि परिवार और क्षेत्र में समय नहीं देने के…
— Yashpal Singh Sisodiya, (@ypssisodiya) February 21, 2026






