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शिक्षा से इंडस्ट्री तक AI का विस्तार, देश का 5वां अग्रणी राज्य बना MP

Written by:Bhawna Choubey
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मध्य प्रदेश ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल में देश में पांचवां स्थान हासिल किया है। अब एआई एजुकेशन, डेटा सेंटर और इंडस्ट्री इकोसिस्टम के जरिए युवाओं को प्रदेश में ही रोजगार और स्टार्टअप के बड़े अवसर देने की तैयारी है।
शिक्षा से इंडस्ट्री तक AI का विस्तार, देश का 5वां अग्रणी राज्य बना MP

मध्य प्रदेश अब सिर्फ कृषि और परंपरागत उद्योगों तक सीमित नहीं रहना चाहता। प्रदेश तकनीक की नई दौड़ में शामिल हो चुका है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में एमपी ने बड़ी छलांग लगाई है और अब यह देश का पांचवां अग्रणी राज्य बन गया है। राजधानी भोपाल से लेकर इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर तक तकनीक की नई बयार बहने लगी है। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में एआई आधारित पढ़ाई, इंडस्ट्री सर्टिफिकेशन और रोजगार का एक नया ढांचा तैयार किया जाएगा।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 के समापन सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश को AI निवेश का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में काम शुरू हो चुका है। प्रदेश में बड़ा डेटा सेंटर स्थापित करने की योजना पर तेजी से प्रयास चल रहे हैं। सरकार की सोच साफ है कि डेटा, तकनीक और टैलेंट एक ही जगह विकसित हों, ताकि युवाओं को बाहर जाने की जरूरत न पड़े।

AI इस्तेमाल में 5वां राज्य बनने का क्या मतलब

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश AI इस्तेमाल के मामले में देश का पांचवां अग्रणी राज्य बन चुका है। इसका मतलब यह है कि सरकारी और निजी क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग तेजी से बढ़ा है। खासकर मेडिकल क्षेत्र में एआई की मदद से बीमारियों की पहचान और इलाज को बेहतर बनाया जा रहा है। अस्पतालों में जांच रिपोर्ट के विश्लेषण, एक्स-रे और स्कैन की पढ़ाई में एआई तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है।

जब कोई राज्य एआई इस्तेमाल में आगे बढ़ता है, तो इसका सीधा असर प्रशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा और उद्योग पर पड़ता है। इससे काम की गति तेज होती है और फैसले ज्यादा सटीक होते हैं। अब सरकार चाहती है कि इस उपलब्धि को सिर्फ मेडिकल तक सीमित न रखा जाए, बल्कि शिक्षा, स्टार्टअप और इंडस्ट्री तक इसका विस्तार किया जाए।

प्रदेश में तैयार होगा मजबूत AI इकोसिस्टम

सरकार ने साफ किया है कि प्रदेश में एक मजबूत एआई इकोसिस्टम बनाया जाएगा। इसका मतलब है कि एआई से जुड़ी हर जरूरी सुविधा एक साथ विकसित की जाएगी। इसमें कंप्यूटर इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर, जीपीयू जैसी हाई-परफॉर्मेंस मशीनें शामिल होंगी। इनकी मदद से बड़ी मात्रा में डेटा प्रोसेस किया जा सकेगा।

दूसरा बड़ा हिस्सा टैलेंट डेवलपमेंट का है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एआई की पढ़ाई शुरू की जाएगी। छात्रों को इंडस्ट्री सर्टिफिकेशन भी दिया जाएगा, ताकि वे सीधे नौकरी या स्टार्टअप की दिशा में कदम बढ़ा सकें। सरकार की कोशिश है कि पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित न रहे, बल्कि उसे रोजगार से जोड़ा जाए।

तीसरा महत्वपूर्ण हिस्सा स्टार्टअप सपोर्ट का है। एआई आधारित स्टार्टअप को फंडिंग, मेंटरशिप और इन्क्यूबेशन की सुविधा दी जाएगी। इससे नए आइडिया को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। चौथा स्तंभ इंडस्ट्री में एआई अपनाने को प्रोत्साहन देना है, ताकि पारंपरिक उद्योग भी तकनीक के साथ कदम मिला सकें। पांचवां हिस्सा रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देना है, जिससे प्रदेश में नई तकनीक विकसित हो सके।

डेटा सेंटर और निवेश की बड़ी तैयारी

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 में मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में एआई आधारित बड़ा डेटा सेंटर स्थापित करने के प्रयास चल रहे हैं। इसके लिए देश और विदेश की कंपनियों को आमंत्रित किया गया है। मध्य प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और पर्याप्त लैंड बैंक को निवेश के लिए मजबूत आधार बताया गया है।

डेटा सेंटर किसी भी एआई सिस्टम की रीढ़ होता है। यहां बड़े स्तर पर डेटा सुरक्षित रखा जाता है और प्रोसेस किया जाता है। अगर मध्य प्रदेश में बड़ा डेटा सेंटर स्थापित होता है, तो इससे हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बन सकते हैं। आईटी कंपनियां, टेक स्टार्टअप और रिसर्च संस्थान यहां काम करने के लिए आकर्षित होंगे।

सरकार की सोच यह है कि डेटा, तकनीक और टैलेंट एक ही जगह विकसित हों। इससे प्रदेश के युवाओं को बाहर महानगरों में जाने की जरूरत कम होगी। वे अपने ही राज्य में आधुनिक तकनीक के साथ काम कर सकेंगे।

वैश्विक कंपनियों से बैठक और नई साझेदारी

समिट के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कई वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधियों से अलग-अलग बैठकें कीं। Genspark AI और Sarvam AI के साथ पायलट प्रोग्राम और सॉवरेन एआई मॉडल पर चर्चा हुई। इसका उद्देश्य यह है कि प्रदेश अपनी जरूरतों के अनुसार एआई मॉडल विकसित कर सके।

गूगल प्ले के साथ भी बातचीत हुई, जिसमें इंदौर और भोपाल में गेमिंग स्टार्टअप, एआई स्किलिंग और एक्सेलरेटर इवेंट आयोजित करने पर विचार किया गया। अगर यह योजनाएं जमीन पर उतरती हैं, तो प्रदेश के युवाओं को ऐप डेवलपमेंट, गेम डिजाइन और एआई आधारित सॉफ्टवेयर निर्माण में नए अवसर मिलेंगे। इस तरह की साझेदारियां मध्य प्रदेश को तकनीकी नक्शे पर मजबूत जगह दिला सकती हैं। इससे निवेश बढ़ेगा और स्थानीय प्रतिभाओं को पहचान मिलेगी।

शिक्षा से रोजगार तक सीधा जुड़ाव

मध्य प्रदेश में एआई एजुकेशन को बढ़ावा देने की योजना सिर्फ डिग्री देने तक सीमित नहीं है। सरकार चाहती है कि कॉलेजों में पढ़ाई के साथ इंडस्ट्री सर्टिफिकेशन भी दिया जाए। इससे छात्रों को यह समझ आएगा कि बाजार में किस तरह की स्किल की जरूरत है।

जब छात्र एआई, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स सीखेंगे, तो वे सीधे आईटी कंपनियों, हेल्थ टेक, एग्रीटेक और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम कर सकेंगे। इससे प्रदेश में रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। एआई इस्तेमाल का दायरा बढ़ने से छोटे उद्योग भी डिजिटल बनेंगे और उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी।

 

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Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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