शहर के व्यस्ततम मार्गों में से एक, कोयला फाटक से गोपाल मंदिर तक के सड़क चौड़ीकरण की योजना पर व्यापारियों के दो गुटों में ठन गई है। कंठाल से छत्री चौक तक प्रस्तावित इस चौड़ीकरण को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि पांच व्यापारियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाकर इस पर स्टे ले लिया है। वहीं, अन्य व्यापारी इस कदम को शहर के विकास में बाधा बताते हुए इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं।
यह मामला तब तूल पकड़ा जब नगर निगम ने चौड़ीकरण के लिए संबंधित व्यापारियों और रहवासियों को नोटिस जारी किए। नोटिस मिलते ही कुछ व्यापारी इसके विरोध में उतर आए, जबकि एक बड़ा धड़ा इसके समर्थन में खड़ा हो गया है।
क्यों जरूरी है चौड़ीकरण?
चौड़ीकरण का समर्थन कर रहे व्यापारी अरविंद मेदेवाला ने बताया कि यह मार्ग शहर की जीवनरेखा है, लेकिन यहां हर रोज भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है। उन्होंने कहा, “इस रास्ते से रोजाना स्कूली बसें गुजरती हैं जो घंटों फंसी रहती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बाबा महाकाल की शाही सवारी भी इसी मार्ग से निकलती है।” उनका कहना है कि भीड़ इतनी अधिक होती है कि लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो जाता है। ऐसे में सड़क का चौड़ा होना शहर की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है।
विकास में ‘अड़ंगा’ लगाने का आरोप
समर्थक व्यापारियों ने विरोध करने वाले पांच कारोबारियों की मंशा पर भी सवाल उठाए हैं। विरोध करने वालों में मनीष गुप्ता, भरत जैन, अनिल गादिया, सौभागमल गादिया और प्रदीप गादिया का नाम सामने आया है। अरविंद मेदेवाला ने आरोप लगाया कि इन व्यापारियों के मकानों की गहराई 65 से 100 फीट तक है, इसके बावजूद वे शहर के विकास के लिए सिर्फ 10 फीट जमीन देने को तैयार नहीं हैं।
“यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्यमंत्री जी उज्जैन को स्मार्ट सिटी बनाने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं और कुछ लोग राज्य सरकार की महत्वपूर्ण विकास योजनाओं में रोड़ा अटका रहे हैं।” — अरविंद मेदेवाला
व्यापारियों के एक गुट ने मांग की है कि नगर निगम को इन पांचों व्यापारियों के मकानों की वास्तविक गहराई की निष्पक्ष माप करानी चाहिए ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके। उनका तर्क है कि यह केवल कुछ लोगों के निजी स्वार्थ का मामला नहीं, बल्कि पूरे शहर के भविष्य और स्मार्ट सिटी योजना से जुड़ा एक अहम मुद्दा है। इस विवाद के कारण फिलहाल यह महत्वपूर्ण परियोजना अधर में लटक गई है।






