माघ मेले को लेकर शुरू हुआ विवाद अब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और सत्ता पक्ष के बीच एक बड़ी जुबानी जंग में तब्दील हो गया है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी और आचार्य प्रमोद कृष्णम द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का समर्थन किए जाने के बाद शंकराचार्य ने एक बड़ा और तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अब उनके मठ पर ‘भाई और कसाई’ नाम से एक बोर्ड लगाया जाएगा।
एक मीडिया चैनल के साथ बातचीत में, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया कि उन्हें सीएम योगी का समर्थन करने वाले धर्माचार्यों से कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है, लेकिन वह गौ-माता की रक्षा के लिए अपने ‘धर्म युद्ध’ से पीछे नहीं हटेंगे।
‘अपने मुंह मियां मिट्ठू बनना कमजोरी की निशानी’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिए गए बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि यह ‘अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने’ जैसा है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति खुद अपनी प्रशंसा करने लगे तो यह समझना चाहिए कि वह कमजोर है। उनके अनुसार, अगर सही मायने में काम किया गया होता तो अपनी प्रशंसा करने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
“हम तंज नहीं कसते। हम तो धर्म युद्ध के लिए बाण चला रहे हैं। योगी आदित्यनाथ का परलोक न बिगड़े, इस भावना से हम भिड़े हुए हैं। हम उनका अच्छा चाहते हैं ताकि जो गलतियां उनसे हो रही हैं, वह दूर हो जाएं।” — शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद
शंकराचार्य ने आगे कहा कि उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योगी आदित्यनाथ जब यह शरीर छोड़कर परलोक जाएं तो उन्हें नरक न जाना पड़े।
‘भाई और कसाई’ बोर्ड का क्या है मतलब?
शंकराचार्य ने बताया कि अन्य धर्माचार्यों के बयानों की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया है। उन्होंने कहा, “हमने यह फैसला लिया है कि अपने मठ पर हम एक बोर्ड लगाएंगे जिसमें दो श्रेणी होंगी। एक श्रेणी में गौ-माता को मां मानने वाला हमारा भाई होगा और दूसरा न मानने वाला कसाई होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने अपने विचार प्रकट किए हैं, यह उनकी प्रकृति को दर्शाता है और भविष्य में जनता उनके साथ कैसा व्यवहार करेगी, यह जनता ही तय करेगी।
डिप्टी सीएम के बटुक पूजन से खत्म नहीं हुआ प्रकरण
जब उनसे पूछा गया कि क्या डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के बटुक पूजन से यह मामला समाप्त हो गया है, तो शंकराचार्य ने साफ किया कि ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा, “जितना बृजेश पाठक ने किया, उसमें उनकी प्रशंसा है, लेकिन यह परिणाम निकाल लेना बिल्कुल उचित नहीं कि यह प्रकरण समाप्त हो गया। जिनके स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई गई थी, वह मुद्दा अभी भी बना हुआ है।” इससे साफ है कि यह विवाद अभी लंबा चल सकता है।






