भोपाल। महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा 2024 में चयनित हुए सैकड़ों अभ्यर्थियों के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। ज्वाइनिंग प्रक्रिया के दौरान मेडिकल सर्टिफिकेट को लेकर आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए सरकार ने ज्वाइनिंग की अंतिम तारीख बढ़ा दी है। अब चयनित अभ्यर्थी 28 फरवरी 2026 तक अपनी ज्वाइनिंग दे सकेंगे।
यह कदम महिला बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया के हस्तक्षेप के बाद उठाया गया है, जब कई जिलों से अभ्यर्थियों ने अपनी परेशानी से विभाग को अवगत कराया था।
क्यों पड़ी तारीख बढ़ाने की जरूरत?
विभाग द्वारा जारी मूल आदेश के अनुसार, चयनित पर्यवेक्षकों को 23 फरवरी 2026 तक ज्वाइन करना था। इसके लिए एक अनिवार्य शर्त यह थी कि उन्हें ज्वाइनिंग से पहले मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा। लेकिन, कई जिलों में मेडिकल बोर्ड की बैठक सप्ताह में केवल एक ही दिन होती है, जिसके कारण निर्धारित समय-सीमा के भीतर सर्टिफिकेट बनवाना लगभग असंभव हो रहा था। इस प्रशासनिक अड़चन के कारण कई योग्य उम्मीदवारों के सामने नौकरी ज्वाइन करने का संकट खड़ा हो गया था।
सरकार ने दिया व्यावहारिक समाधान
अभ्यर्थियों की समस्याओं पर संज्ञान लेते हुए मंत्री निर्मला भूरिया ने विभागीय अधिकारियों को तत्काल राहत देने के निर्देश दिए। इन निर्देशों के तहत दो बड़े बदलाव किए गए हैं:
1. अंतिम तिथि में विस्तार: ज्वाइनिंग की अंतिम तिथि को 23 फरवरी से बढ़ाकर 28 फरवरी 2026 कर दिया गया है।
2. प्रमाण-पत्र जमा करने में छूट: यदि कोई अभ्यर्थी ज्वाइनिंग के समय तक मेडिकल बोर्ड का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं कर पाता है, तो उसे मध्यप्रदेश शासन के मूलभूत नियम 10 (ए) के तहत एक महीने का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। वे ज्वाइनिंग के एक माह के भीतर अपना स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र जमा कर सकते हैं।
“राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पात्र अभ्यर्थी को अनावश्यक प्रशासनिक बाधाओं का सामना न करना पड़े। हम एक पारदर्शी और संवेदनशील व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं।”- निर्मला भूरिया, महिला बाल विकास मंत्री
मंत्री ने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि इन नए दिशा-निर्देशों को सभी जिलों में तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए, ताकि किसी भी तकनीकी कारण से कोई भी चयनित उम्मीदवार नियुक्ति से वंचित न रह जाए। इस फैसले से उन सभी अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली है जो सर्टिफिकेट की प्रक्रिया को लेकर चिंतित थे।






