अक्षय तृतीया का दिन जहां शुभ विवाहों के लिए जाना जाता है, वहीं इस बार मध्यप्रदेश में इस दिन को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। वजह है बाल विवाह एक ऐसी कुप्रथा, जो आज भी कई इलाकों में देखने को मिलती है।
इस बार सरकार ने साफ संदेश दिया है कि अगर किसी ने नाबालिग की शादी कराने की कोशिश की, तो एक फोन कॉल से पूरा विवाह रुक सकता है। हेल्पलाइन नंबर 181 और 1098 को सक्रिय किया गया है, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके।
अक्षय तृतीया पर क्यों बढ़ती है बाल विवाह की आशंका
अक्षय तृतीया को देशभर में बड़े पैमाने पर सामूहिक विवाह आयोजित किए जाते हैं। इस दिन को शुभ मानकर कई जगहों पर बिना उम्र की सही जांच किए विवाह कर दिए जाते हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह के मामले सामने आते हैं, जो बच्चों के भविष्य के लिए खतरनाक साबित होते हैं।
हर जिले में कंट्रोल रूम और उड़नदस्ते
इस बार महिला एवं बाल विकास विभाग ने बाल विवाह रोकने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। सभी जिलों में कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे और उड़नदस्ते तैनात किए जाएंगे, जो सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचेंगे और शादी को रुकवाएंगे। यह कदम साफ दिखाता है कि प्रशासन इस बार कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहता।
181 और 1098 हेल्पलाइन बनेगी सबसे बड़ा हथियार
बाल विवाह की सूचना देने के लिए सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 181, 1098 और 112 को सक्रिय किया है। अब आम लोग भी इस अभियान का हिस्सा बन सकते हैं। अगर कहीं भी नाबालिग की शादी होती दिखे, तो सिर्फ एक कॉल करके प्रशासन को सूचना दी जा सकती है और तुरंत कार्रवाई संभव होगी।
गांव-गांव में बनेगी निगरानी टीम
बाल विवाह रोकने के लिए सिर्फ प्रशासन ही नहीं, बल्कि समाज के लोगों को भी जिम्मेदारी दी गई है। हर गांव और वार्ड में सूचना दल बनाए जाएंगे, जिनमें शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता और पंचायत प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनका काम संदिग्ध मामलों की पहचान करना और समय पर सूचना देना होगा।
स्कूल-कॉलेजों में चलाया जाएगा जागरूकता अभियान
इस अभियान का एक बड़ा हिस्सा जागरूकता भी है। स्कूल और कॉलेजों में छात्रों को बाल विवाह के नुकसान के बारे में बताया जाएगा। इसके साथ ही रैलियां और समूह चर्चाएं भी आयोजित की जाएंगी, ताकि समाज में इस कुप्रथा के खिलाफ माहौल बनाया जा सके।
पंचायत और जनप्रतिनिधि भी लेंगे शपथ
अक्षय तृतीया के दिन पंच, सरपंच, सचिव और पार्षद बाल विवाह नहीं होने देने की शपथ लेंगे। यह पहल समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे लोगों में जिम्मेदारी की भावना बढ़ेगी।






