मध्य प्रदेश में आवारा कुत्तों और सड़कों पर घूमते बेसहारा मवेशियों की समस्या लंबे समय से आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। स्कूल जाने वाले बच्चे हों, अस्पताल पहुंचने वाले मरीज या रोजमर्रा की आवाजाही करने वाले लोग हर कोई इस खतरे से जूझ रहा है। बीते कुछ वर्षों में कुत्तों के काटने और मवेशियों की वजह से सड़क हादसों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।
सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब मध्य प्रदेश सरकार हरकत में आई है। सरकार ने पहली बार आवारा कुत्तों और बेसहारा मवेशियों के प्रबंधन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की है। सरकार का कहना है कि इस एसओपी के जरिए समस्या का स्थायी और व्यवस्थित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि सार्वजनिक स्थान सुरक्षित बनाए जा सकें।
आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए बनाई गई स्पष्ट SOP
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जारी SOP में साफ तौर पर कहा गया है कि आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थलों से हटाया जाएगा। इसके लिए स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थानों को बाउंड्रीवाल से सुरक्षित किया जाएगा, ताकि कुत्ते इन परिसरों में प्रवेश न कर सकें।
स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र में उन स्थानों को चिन्हित करें, जहां आवारा कुत्तों से जुड़ी शिकायतें सबसे ज्यादा मिल रही हैं। ऐसे इलाकों में चरणबद्ध तरीके से बाउंड्रीवाल, गेट और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि बिना क्षेत्र चिन्हांकन के प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है।
स्कूल, कॉलेज और अस्पताल रहेंगे सरकार के खास फोकस में
SOP के तहत शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है। उच्च शिक्षा विभाग के 250 कॉलेजों, स्कूल शिक्षा विभाग और खेल एवं युवा कल्याण विभाग की कुल 40,545 संस्थाओं में बाउंड्रीवाल निर्माण की योजना बनाई गई है।
प्रदेश में कुल 11,840 अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें से 4,573 संस्थानों में पहले से बाउंड्रीवाल मौजूद है, जबकि शेष अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में बाउंड्रीवाल का निर्माण किया जाएगा। सरकार का मानना है कि बच्चों, मरीजों और बुजुर्गों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसमें किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
आश्रय स्थल और शेल्टर होम पर सरकार का जोर
आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रदेश में डॉग शेल्टर होम और आश्रय स्थल बनाए जाने पर जोर दिया गया है। इसके लिए सभी नगरीय निकायों से अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद कुत्तों की संख्या का डाटा एकत्र किया जा रहा है।
सरकार ने स्वीकार किया है कि प्रदेश के कई शहरों में फिलहाल डॉग शेल्टर होम की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बिना आश्रय स्थलों के कुत्तों का वैज्ञानिक और मानवीय प्रबंधन संभव नहीं हो पाता। SOP के तहत शेल्टर होम निर्माण और संचालन को प्राथमिक कार्यों में शामिल किया गया है।
बेसहारा मवेशियों के लिए भी तय की गई अलग रणनीति
SOP में आवारा कुत्तों के साथ-साथ सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा मवेशियों के प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। हाईवे और शहरी इलाकों में उन स्थानों को चिन्हित किया जाएगा, जहां मवेशियों का जमावड़ा अधिक रहता है।
पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई, एमपीआरडीसी और स्थानीय प्रशासन के आपसी समन्वय से ऐसे मवेशियों को पकड़कर निकाय या पंचायत क्षेत्रों में बनाए गए स्थायी शेड में रखा जाएगा। नई सड़कों के किनारे गोशालाओं का निर्माण अनिवार्य किए जाने की भी व्यवस्था SOP में शामिल है।
नोडल अधिकारी की नियुक्ति और जवाबदेही तय
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने यह SOP सभी जिला कलेक्टरों को जारी कर दी है। हर जिले में आवारा कुत्तों और बेसहारा मवेशियों के प्रबंधन के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। यही अधिकारी अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय बनाएगा और यह सुनिश्चित करेगा कि SOP का पालन जमीन पर सही तरीके से हो। सरकार का मानना है कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है।





