सिविल जज परीक्षा 2022: 121 ST सीटों पर शून्य चयन पर MP हाई कोर्ट सख्त, न्यूनतम अंक घटाकर नई मेरिट लिस्ट बनाने का आदेश..

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सिविल जज भर्ती 2022 में 121 ST पद खाली रहने पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने SC-ST उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम अंक घटाकर और इंटरव्यू में छूट देकर नई मेरिट सूची बनाने का आदेश दिया है, जिसे आदिवासी कांग्रेस ने 'ऐतिहासिक जीत' बताया है।
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नई दिल्ली। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सिविल जज भर्ती परीक्षा-2022 में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित 121 में से एक भी पद पर चयन न होने को ‘अत्यंत गंभीर’ मामला माना है। कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए पूरी चयन प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी की ओर इशारा किया है और एक नई संशोधित मेरिट सूची तैयार करने का अहम आदेश जारी किया है।

यह फैसला उन याचिकाओं पर आया है जिनमें भर्ती प्रक्रिया में SC-ST उम्मीदवारों के साथ अन्याय का आरोप लगाया गया था। कोर्ट ने माना कि 191 पदों में से 121 ST पद खाली रह जाना सामान्य बात नहीं है और यह चयन प्रक्रिया की खामियों को उजागर करता है।

कोर्ट का निर्णायक आदेश

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं, जिनसे रुकी हुई भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि:

SC (अनुसूचित जाति) के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम अर्हता अंक 45% मानकर एक नई सूची तैयार की जाए। इसी तरह, ST (अनुसूचित जनजाति) के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम अंक 40% माने जाएं। इसके अलावा, साक्षात्कार (इंटरव्यू) में न्यूनतम 20 अंकों तक की छूट दी जाए। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस आधार पर तैयार संशोधित मेरिट सूची को अगली सुनवाई में पेश किया जाए।

‘यह न्याय और समानता की जीत है’

इस फैसले पर आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया ने खुशी जाहिर करते हुए इसे आदिवासी समाज और उनके संघर्ष की एक बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि वे लगातार इस मुद्दे को उठा रहे थे कि चयन प्रक्रिया में भेदभाव हो रहा है।

“121 में से शून्य चयन के जिस अन्याय को हम पिछले कई दिनों से उठा रहे थे, आज हाई कोर्ट ने भी उसी पर उंगली रख दी। कोर्ट का यह आदेश हमारी लड़ाई की बड़ी जीत है और सिस्टम में बैठे भेदभाव पर करारा जवाब है।” — डॉ. विक्रांत भूरिया, राष्ट्रीय अध्यक्ष, आदिवासी कांग्रेस

डॉ. भूरिया ने आरोप लगाया कि स्क्रीनिंग और कट-ऑफ के नियम आदिवासी युवाओं को जानबूझकर प्रक्रिया से बाहर करने के लिए बनाए गए थे। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ़ कानूनी जीत नहीं, यह न्याय, समानता और संवैधानिक अधिकारों की जीत है। आदिवासी समाज की आवाज़ आखिरकार न्यायालय तक पहुँची है।”

कांग्रेस ने की न्यायिक जांच की मांग

हाई कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने इस मामले में आगे की कार्रवाई की मांग की है। डॉ. भूरिया ने कहा कि अब यह जरूरी हो गया है कि:

1. सिविल जज-2022 की पूरी चयन प्रक्रिया की न्यायिक जांच कराई जाए।
2. स्क्रीनिंग, कट-ऑफ और मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो।
3. भविष्य में ऐसी गड़बड़ियां न हों, इसके लिए आदिवासी युवाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु एक ठोस रोडमैप बनाया जाए।

Banshika Sharma
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मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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