उज्जैन में वीर भारत न्यास की जमीन को लेकर कांग्रेस की प्रदेश महासचिव निधि चतुर्वेदी (Nidhi Chaturvedi) ने दिग्विजय सिंह पर सार्वजनिक विरोध का आरोप लगाया था। जीतू पटवारी के खिलाफ दिए गए बयान की निंदा की थी। जिसके बाद एमपी कांग्रेस कमेटी के संगठन प्रभारी संजय कामले ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया। 7 दिनों के भीतर जवाब भी मांगा था। निधि चतुर्वेदी ने फेसबुक पर एक पोस्ट साझा करते हुए बताया कि उन्होंने 3 जुलाई को जारी नोटिस का जवाब 9 जुलाई को दे दिया है।
कांग्रेस महासचिव ने संजय कमले द्वारा जारी किये नोटिस को असंवैधानिक और अनाधिकृत बताया है। उन्होंने कहा कि “मैं मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की महासचिव हूं, न कि किसी जिले की महामंत्री या महासचिव। मेरा पद भी संगठन प्रभारी के समकक्ष है, तो आपने किस संवैधानिक हैसियत से मुझे नोटिस जारी किया।” निधि चतुर्वेदी ने नोटिस में पदनाम में जानबूझकर गलती करने और कोई भी स्पष्ट कारण न बताने का आरोप भी लगाया है।
कांग्रेस पार्टी के नियमों का हवाला दिया
निधि चतुर्वेदी ने पत्र में कहा कि, “संगठन प्रभारी के पास अपने ही किसी समकक्ष प्रदेश पदाधिकारी को दंडात्मक या कारण बताओं नोटिस जारी करने का कोई भी अधिकार नहीं है। यह इसका अधिकार केवल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष या गठित प्रदेश अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति के पास सुरक्षित है। उन्होंने चयनात्मक रूप से टारगेट बनाकर कार्रवाई करने के आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने कहा कि “इस घटनाक्रम के खिलाफ पार्टी की कई वरिष्ठ नेताओं ने आपत्ती जताई थी। लेकिन केवल मुझे चुनकर टारगेट बनाया गया और नोटिस भेजा गया। अन्य नेताओं के खिलाफ कोई भी अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?” उन्होंने लैंगिक एवं सामाजिक भेदभाव के आरोप लगाए हैं।
मानहानि का आरोप, 7 दिनों के भीतर मांगा स्पष्टीकरण
पत्र में कांग्रेस प्रदेश महासचिव ने कहा, ” पत्र मुझे आधिकारिक रूप से मिलने के पहले ही मीडिया और सोशल मीडिया में जानबूझकर लीक कर दिया गया। जिससे मेरी व्यक्तिगत सामाजिक प्रतिष्ठा और राजनीतिक छवि को क्षति पहुंची।” उन्होंने इस मामले को मानहानि की कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
आगे उन्होंने कहा कि, “मानहानि कृत्य और संगठनिक स्तर पर लैंगिक एवं सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा देने वाली कार्रवाई पर आपका लिखित स्पष्टीकरण 7 दिन के भीतर अपेक्षित है। यदि आपका जवाब संतोष जनक नहीं हुआ तो इस स्थिति में इस अनाधिकृत काम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का कदम भी उठाया जा सकता है।”







