नई दिल्ली: महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान हादसे की जांच कर रही एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट में दुर्घटना के पीछे कई चौंकाने वाले कारण सामने आए हैं, जिनमें एयरपोर्ट पर मौजूद गंभीर खामियों से लेकर मौसम की जानकारी देने में हुई लापरवाही तक शामिल है। रिपोर्ट ने बारामती एयरफील्ड की सुरक्षा और परिचालन प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच में यह बात सामने आई है कि जिस वक्त विमान लैंडिंग की कोशिश कर रहा था, उस समय विजिबिलिटी बेहद कम थी। इसके अलावा, हवाई क्षेत्र एक ‘अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड’ था, जहां नेविगेशन के लिए जरूरी आधुनिक सुविधाएं मौजूद नहीं थीं।
एयरपोर्ट पर सुविधाओं का भारी अभाव
AAIB की टीम ने जब घटनास्थल का निरीक्षण किया, तो हवाई अड्डे के इंफ्रास्ट्रक्चर में कई बड़ी कमियां पाई गईं, जो इस प्रकार हैं:
- अनियंत्रित एयरफील्ड: बारामती एयरपोर्ट एक अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड है, जहां विंड सॉक्स (हवा की दिशा बताने वाला उपकरण) के अलावा कोई नेविगेशनल सहायता उपलब्ध नहीं है।
- अधूरी सुविधाएं: रनवे 11 की तरफ कोई विंड सॉक नहीं था, जबकि रनवे 29 पर दो विंड सॉक्स लगे थे। यहां सिर्फ विजुअल फ्लाइट रूल्स (VFR) के तहत ही ऑपरेशन हो सकते हैं।
- खराब रनवे: रनवे की आखिरी बार री-कारपेटिंग मार्च 2016 में हुई थी। इसके बाद मरम्मत न होने से रनवे के सभी निशान फीके पड़ चुके थे और सतह पर बजरी उखड़ने लगी थी।
- सुरक्षा में चूक: एयरोड्रम के चारों ओर कोई स्थायी बाउंड्री वॉल नहीं है और जो फेंसिंग है, वह भी पूरे इलाके को कवर नहीं करती।
- फायर सेफ्टी नदारद: एयरपोर्ट के पास अपनी खुद की एयरक्राफ्ट रेस्क्यू एंड फायर फाइटिंग (ARFF) यूनिट नहीं है। किसी भी आपात स्थिति के लिए बारामती नगर निगम की एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड पर निर्भर रहना पड़ता है।
मौसम की गलत जानकारी बनी बड़ी वजह
रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू मौसम की जानकारी देने के तरीके से जुड़ा है। बारामती एयरफील्ड में मौसम विभाग (MET) की कोई आधिकारिक सुविधा नहीं है। यहां M/s कार्वर एविएशन नामक एक फ्लाइंग ट्रेनिंग कंपनी के अस्थायी टावर में लगे उपकरण से हवा, तापमान आदि की जानकारी दी जाती है।
हादसे वाले दिन, विमान के क्रू ने लैंडिंग से पहले जब विजिबिलिटी पूछी, तो टावर पर मौजूद एक ग्राउंड इंस्ट्रक्टर ने विजिबिलिटी मार्कर देखकर 3000 मीटर बताई। जबकि VFR फ्लाइट के लिए न्यूनतम आवश्यक विजिबिलिटी 5000 मीटर (5 किलोमीटर) होती है। इसका मतलब है कि विमान को खतरनाक रूप से कम दृश्यता में उतरने की मंजूरी दी गई। टावर ने हवाओं को भी शांत बताया था।
कैसे हुआ था यह दर्दनाक हादसा?
विमान (VT-SSK) पुणे से बारामती आ रहा था और रनवे 11 पर उतरने का प्रयास कर रहा था। कम विजिबिलिटी के बावजूद विमान ने अप्रोच जारी रखा, लेकिन पहले प्रयास में असफल होने पर गो-अराउंड किया। दूसरे प्रयास के दौरान, क्रू ने ‘फील्ड इन साइट’ (रनवे दिख रहा है) की सूचना दी, जिसके बाद टावर ने लैंडिंग की इजाजत दे दी।
हालांकि, विमान रनवे पर उतरने के बजाय बाईं ओर लगभग 50 मीटर दूर पेड़ों और जमीन से टकरा गया। पास के एक सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि जमीन से टकराने से ठीक पहले विमान दाईं ओर झुका हुआ था। टक्कर के तुरंत बाद विमान में भीषण आग लग गई, जिससे उसका कॉकपिट और केबिन पूरी तरह जलकर खाक हो गया।






