कबूतरों को दाना डालने पर बीएमसी का प्रतिबंध कायम, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के कबूतरों को दाना डालने पर लगाए गए प्रतिबंध को बरकरार रखा। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बीएमसी मनमाने ढंग से फैसले नहीं बदल सकती और किसी भी बदलाव से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।
कबूतरों को दाना डालने पर बीएमसी का प्रतिबंध कायम, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के कबूतरों को दाना डालने पर लगाए गए प्रतिबंध को बरकरार रखा। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बीएमसी मनमाने ढंग से फैसले नहीं बदल सकती और किसी भी बदलाव से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। यह आदेश ऐसे समय आया है जब हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्रों में आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम भेजने का निर्देश दिया था। कोर्ट का मानना है कि इस तरह के फैसले सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य और नागरिकों के अधिकारों से जुड़े होते हैं।

हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

बीएमसी के वकील रामचंद्र आप्टे ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में एक विशेष समिति नियुक्त की गई है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं की जांच करेगी। समिति अपनी सिफारिशें तैयार कर कोर्ट में पेश करेगी, जिसके आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। वहीं, याचिकाकर्ता के वकील हरीश जे. पांड्या ने बताया कि पहले बीएमसी ने अस्थायी रूप से दाना डालने की अनुमति के लिए आवेदन करने का प्रावधान रखा था। दो याचिकाकर्ताओं ने आवेदन दिए, लेकिन बीएमसी को केवल एक आवेदन मिला। कोर्ट ने निर्देश दिया कि गुरुवार तक दोनों आवेदनों की प्रतियां बीएमसी के वकीलों को उपलब्ध कराई जाएं।

सुनवाई के दौरान बीएमसी ने प्रस्ताव दिया कि सुबह 6 से 8 बजे के बीच कुछ शर्तों के साथ कबूतरों को दाना डालने की अनुमति दी जा सकती है। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब पहले सार्वजनिक हित में प्रतिबंध लगाया गया था, तो अब किसी एक व्यक्ति की मांग पर इसे कैसे बदला जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि निर्णय बदलने से पहले सभी हितधारकों से राय लेना जरूरी है, ताकि किसी के संवैधानिक अधिकार या सार्वजनिक स्वास्थ्य पर विपरीत असर न पड़े।

कोर्ट ने बीएमसी को सख्त निर्देश दिया कि किसी भी फैसले में बदलाव से पहले कानूनी प्रक्रिया अपनाएं, सार्वजनिक नोटिस जारी करें और नागरिकों से सुझाव लें। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि पालिका सीधे फैसला नहीं ले सकती और ऐसे मामलों में व्यापक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। फिलहाल, कबूतरों को दाना डालने पर लगा प्रतिबंध यथावत रहेगा, जब तक समिति की सिफारिशों के आधार पर आगे की कार्यवाही नहीं होती।

लेखक के बारे में
Follow Us :GoogleNews