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मुंबई प्रदूषण पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, पूर्व SC जज की अध्यक्षता में निगरानी के लिए बनेगी हाई लेवल कमेटी

Written by:Gaurav Sharma
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मुंबई और आसपास के इलाकों में बढ़ते वायु प्रदूषण पर राज्य सरकार और नगर निकायों के कदमों से असंतुष्ट बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक उच्चस्तरीय समिति बनाने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली यह कमेटी उपायों के अनुपालन की निगरानी करेगी और ठोस परिणाम सुनिश्चित करेगी।
मुंबई प्रदूषण पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, पूर्व SC जज की अध्यक्षता में निगरानी के लिए बनेगी हाई लेवल कमेटी

मुंबई: मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार और नगर निकायों द्वारा अब तक उठाए गए कदमों को ‘नाकाफी’ बताते हुए स्थिति की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक हाई लेवल कमेटी (उच्चस्तरीय समिति) गठित करने का फैसला किया है।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ ने अक्टूबर 2023 में इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों को स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार मिले।

क्यों पड़ी कमेटी की जरूरत?

अदालत ने पाया कि पिछले साल नवंबर में दिए गए निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई खास सुधार नहीं दिखा है। दिसंबर में प्रदूषण का स्तर ‘बहुत गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गया था, जिसने अदालत की चिंता को और बढ़ा दिया।

पीठ ने कहा कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) और मुंबई व नवी मुंबई नगर निगमों द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे संतोषजनक नहीं हैं। अदालत ने टिप्पणी की, “प्रयास किए गए होंगे, लेकिन परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं।” अदालत ने यह भी माना कि मामलों के भारी बोझ के कारण हर हलफनामे की सूक्ष्म जांच संभव नहीं है, इसलिए एक समर्पित निगरानी तंत्र की आवश्यकता है।

समिति की भूमिका और अधिकार

प्रस्तावित हाई-पावर कमेटी को व्यापक अधिकार दिए जाएंगे ताकि वह प्रभावी ढंग से काम कर सके।

समिति की मुख्य जिम्मेदारियां:

  • सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश इसकी अध्यक्षता करेंगे।
  • समिति रोजाना बैठक कर प्रदूषण नियंत्रण के उपायों के अनुपालन की समीक्षा करेगी।
  • यह सभी नगर निकायों और संबंधित सरकारी एजेंसियों से प्रगति रिपोर्ट तलब कर सकेगी।
  • अदालत यह सुनिश्चित करेगी कि समिति को फैसले लागू कराने के लिए जरूरी सुविधाएं और अधिकार मिलें।

अदालत ने कहा कि समिति के सदस्यों के नामों की घोषणा लिखित आदेश में की जाएगी।

प्रदूषण पीड़ितों को मुआवजे का संकेत

एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि प्रदूषण से प्रभावित नागरिकों को मुआवजा देने के सुझाव पर विचार किया जा सकता है। नवी मुंबई नगर निगम ने दलील दी थी कि पहले से ही वैधानिक निकाय मौजूद हैं, लेकिन कोर्ट ने कहा कि मौजूदा कार्यवाही में उन निकायों की कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इसलिए, नई समिति को कुछ अधिकार देना आवश्यक है।

अदालत ने जोर देकर कहा कि मुंबई जैसे महानगर में प्रदूषण को कम करना एक प्राथमिकता होनी चाहिए और इस मामले में सभी एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाएगी। इस कदम से उम्मीद है कि केवल कागजी कार्रवाई के बजाय वायु गुणवत्ता में वास्तविक सुधार देखने को मिलेगा।