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‘लाडकी बहिन’ योजना में लाभार्थियों की संख्या घटाने पर घर-घर में विवाद

Written by:Neha Sharma
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महाराष्ट्र सरकार ने मुख्यमंत्री ‘लाडकी बहिन’ योजना के लाभार्थियों की संख्या कम करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत पात्रता की शर्तों के आधार पर महिलाओं की सूची में कटौती की जा रही है।
‘लाडकी बहिन’ योजना में लाभार्थियों की संख्या घटाने पर घर-घर में विवाद

महाराष्ट्र सरकार ने मुख्यमंत्री ‘लाडकी बहिन’ योजना के लाभार्थियों की संख्या कम करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत पात्रता की शर्तों के आधार पर महिलाओं की सूची में कटौती की जा रही है। नियम के अनुसार, एक परिवार में अधिकतम दो महिलाओं को ही योजना का लाभ मिल सकता है। हालांकि, कई घरों में इससे ज्यादा महिलाएं लाभ उठा रही हैं। अब आंगनवाड़ी सेविकाएं घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं और अतिरिक्त नामों को हटाने का काम कर रही हैं। इस प्रक्रिया के चलते कई परिवारों में विवाद की स्थिति पैदा हो गई है।

‘लाडकी बहिन’ योजना से घर-घर में विवाद

लोकसभा चुनाव में महायुति सरकार को करारा झटका लगा था, जब 48 में से सिर्फ 17 सीटें ही उसके खाते में आईं। इसके बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में सरकार ने ‘लाडकी बहिन’ योजना शुरू की, जिसके तहत महिलाओं के खातों में हर महीने 1,500 रुपये जमा होने लगे। इस योजना से विधानसभा चुनाव में महायुति को बड़ा फायदा हुआ और उसने 230 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की। लेकिन अब यही योजना कई घरों में तनाव का कारण बन गई है, क्योंकि लाभार्थियों की संख्या घटाने के फैसले ने रिश्तों में खटास डाल दी है।

आंगनवाड़ी सेविकाओं को लाभार्थियों की सूची से अतिरिक्त नाम हटाने की जिम्मेदारी दी गई है। वे घर-घर जाकर यह पूछ रही हैं कि किनका नाम हटाया जाए। इस दौरान उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर सास-बहू, देवरानी-जिठानी जैसे रिश्तेदार आपस में भिड़ रहे हैं। सेविकाओं के अनुसार, कुछ महिलाएं उन्हें कोई जानकारी देने से साफ इनकार कर देती हैं, तो कुछ गुस्से में सवाल करती हैं कि “हमारा नाम काटने वाले आप कौन होते हैं?”

छत्रपति संभाजीनगर की एक आंगनवाड़ी सेविका ने बताया कि सर्वे के दौरान महिलाएं कहती हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री ने उम्मीद से पैसे दिए हैं और उन्हें रोकने का अधिकार किसी को नहीं है। “हम रेशन कार्ड के आधार पर सूची लाते हैं और बताते हैं कि दो ही महिलाओं को लाभ मिलेगा, लेकिन कई लाभार्थी नाराज होकर जवाब देती हैं कि यह पैसा हमें ऊपर से मिलता है, हम आपको कुछ नहीं बताएंगे,” सेविका ने कहा। इस तरह, योजना के तहत लाभ घटाने की कवायद सरकारी कर्मचारियों के लिए एक चुनौतीपूर्ण और तनावपूर्ण काम बन गई है।