मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने एक कड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए शुक्रवार को एक वरिष्ठ IAS अधिकारी समेत दो अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश जारी किया। यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि वे भाजपा की मंत्री पंकजा मुंडे द्वारा बुलाई गई एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं हुए थे। इस फैसले ने नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि सिर्फ बैठक में शामिल न होने पर निलंबन जैसी कार्रवाई दुर्लभ मानी जाती है।
यह पूरा मामला महाराष्ट्र विधानसभा में चंद्रपुर जिले में बढ़ते प्रदूषण के स्तर पर चल रही चर्चा के दौरान सामने आया। बहस के दौरान, पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने सदन को सूचित किया कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) के संबंधित वरिष्ठ अधिकारी बार-बार बैठकों से अनुपस्थित रहे।
प्रोटेम स्पीकर ने बताया ‘लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान’
मंत्री की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए, महाराष्ट्र विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर दिलीप लांडे ने इसे एक गंभीर मामला माना। उन्होंने अधिकारियों की इस गैरहाजिरी को ‘घोर लापरवाही और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान’ करार दिया। लांडे ने सदन में ही दोनों अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दे दिया।
निलंबित किए गए अधिकारियों में MPCB के सदस्य सचिव एम. देवेंद्र सिंह, जो एक IAS अधिकारी हैं, और संयुक्त निदेशक सतीश पडवाल शामिल हैं। प्रोटेम स्पीकर ने इस बात पर जोर दिया कि चुने हुए प्रतिनिधियों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
“अधिकारियों ने मंत्री के निर्देशों का पालन नहीं किया और महाराष्ट्र के लोगों के प्रति अपनी ड्यूटी को नजरअंदाज किया।”- दिलीप लांडे, प्रोटेम स्पीकर, महाराष्ट्र विधानसभा
लांडे ने कहा कि यह कार्रवाई एक संदेश है कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकते। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर अधिकारियों को गंभीरता दिखानी होगी और निर्देशों का पालन करना होगा। इस घटना ने प्रशासन में जवाबदेही के सवाल को फिर से केंद्र में ला दिया है।





