मुंबई में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील ने एक बार फिर उपवास शुरू किया है। इस आंदोलन के चलते महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से लाखों मराठा प्रदर्शनकारी गाड़ियों से मुंबई पहुंचे हैं। दक्षिण मुंबई में ट्रैफिक जाम और रोड ब्लॉक से आम लोगों को भारी दिक्कतें हो रही हैं। इस बीच राजनीतिक दल भी अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने कहा है कि इस मुद्दे पर जवाब सिर्फ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ही दे सकते हैं।
राज ठाकरे का एकनाथ शिंदे पर बड़ा बयान
शनिवार (30 अगस्त) को ठाणे दौरे पर पहुंचे राज ठाकरे से जब पत्रकारों ने मराठा आंदोलन पर सवाल पूछा, तो उन्होंने साफ कहा कि “मनोज जरांगे फिर से क्यों आए, इसका जवाब एकनाथ शिंदे ही देंगे। पिछली बार जब वे नवी मुंबई गए थे, तब उन्होंने समाधान किया था। अब मुंबई में फिर से आंदोलन क्यों हो रहा है, यह पूछना भी उन्हीं से चाहिए।” राज ठाकरे ने कहा कि आंदोलन के कारण मुंबईवासियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है और इसका हल सिर्फ शिंदे ही बता सकते हैं।
इसी बीच सह्याद्री अतिथिगृह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की एक घंटे लंबी बैठक हुई। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में मुख्य रूप से मराठा आरक्षण मुद्दे पर चर्चा की गई। इसके अलावा आगामी महानगरपालिका चुनावों पर भी विचार-विमर्श हुआ। बैठक का केंद्रबिंदु यह रहा कि ओबीसी आरक्षण के माध्यम से मराठा समाज को कैसे लाभ दिया जा सकता है और इस दिशा में मध्यस्थता की क्या प्रक्रिया अपनाई जाए।
मनोज जरांगे की प्रमुख मांग है कि मराठा समाज को ओबीसी श्रेणी के तहत 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। उनका कहना है कि सभी मराठाओं को ओबीसी की कृषि प्रधान जाति कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए, ताकि उन्हें सरकारी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण का लाभ मिल सके। लेकिन इस आंदोलन ने जहां सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है, वहीं यातायात व्यवस्था और आम जनता के लिए यह चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। राज ठाकरे के इस बयान के बाद साफ है कि अब राजनीतिक हलचल और तेज होगी और एकनाथ शिंदे पर जवाब देने का सीधा दबाव बढ़ गया है।





