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मराठा आरक्षण पर सरकार के फैसले से भुजबल नाराज, ओबीसी नेताओं की आपात बैठक बुलाई

Written by:Neha Sharma
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महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार ने पात्र मराठों को कुनबी जाति का प्रमाण पत्र देने की मांग मान ली है। इस फैसले को लेकर ओबीसी नेता और मंत्री छगन भुजबल नाराज हैं।
मराठा आरक्षण पर सरकार के फैसले से भुजबल नाराज, ओबीसी नेताओं की आपात बैठक बुलाई

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार ने पात्र मराठों को कुनबी जाति का प्रमाण पत्र देने की मांग मान ली है। इस फैसले को लेकर ओबीसी नेता और मंत्री छगन भुजबल नाराज हैं। बुधवार को उन्होंने कैबिनेट बैठक बीच में ही छोड़ दी। भुजबल लंबे समय से ओबीसी कोटे में मराठों को आरक्षण देने का विरोध करते रहे हैं। उधर, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मनोज जरांगे ने सरकार के कदम को अपनी जीत बताया और अनशन समाप्त कर दिया।

सरकार के फैसले से भुजबल नाराज

भुजबल ने अपनी नाराजगी जताते हुए ओबीसी नेताओं की आपात बैठक बुलाने का ऐलान किया है। यह बैठक बांद्रा स्थित उनके दफ्तर में होगी। वहीं, ओबीसी समाज की असहमति दूर करने के लिए सरकार ने समिति गठित करने की घोषणा की है। दरअसल, सरकार के आदेश के बाद मराठा समुदाय के वे लोग जिनके पास दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं, उन्हें कुनबी दर्जा मिल सकेगा। इससे उन्हें ओबीसी आरक्षण का लाभ प्राप्त करने का अधिकार होगा।

छगन भुजबल ने मंगलवार को कहा था कि वह सरकार के प्रस्ताव का विस्तार से अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनकी टीम कानूनी विशेषज्ञों से भी विचार-विमर्श कर रही है। भुजबल का कहना है कि ओबीसी आरक्षण का हक किसी अन्य समाज को देने से मूल ओबीसी समाज के अधिकारों पर असर पड़ सकता है। नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री भुजबल ने स्पष्ट किया कि विस्तृत अध्ययन के बाद ही वह अपने विचार सामने रखेंगे।

महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार देर शाम हैदराबाद गजट के आधार पर आदेश जारी किया। इसके तहत पात्र मराठों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र देने और इस प्रक्रिया में मदद के लिए समिति बनाई गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में मनोज जरांगे के अनशन खत्म करने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने मराठा समुदाय के हित में समाधान ढूंढ निकाला है। फडणवीस ने बताया कि जरांगे की प्रमुख मांग हैदराबाद गजटियर को लागू करने की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरक्षण किसी समुदाय को सामूहिक रूप से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत साक्ष्यों के आधार पर दिया जाएगा।