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मुंबई में पहला अधिकृत कबूतरखाना, मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने किया उद्घाटन

Written by:Neha Sharma
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महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री और बीजेपी नेता मंगल प्रभात लोढ़ा ने रविवार (14 सितंबर) को संजय गांधी नेशनल पार्क में नया कबूतरखाना उद्घाटन किया। यह कबूतरखाना तीन मूर्ति जैन मंदिर के पास बनाया गया है।
मुंबई में पहला अधिकृत कबूतरखाना, मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने किया उद्घाटन

महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार में मंत्री और बीजेपी नेता मंगल प्रभात लोढ़ा ने रविवार (14 सितंबर) को संजय गांधी नेशनल पार्क में नया कबूतरखाना उद्घाटन किया। यह कबूतरखाना तीन मूर्ति जैन मंदिर के पास बनाया गया है। इसके लिए जमीन दिगंबर जैन समुदाय की ओर से दी गई है। उद्घाटन समारोह में मंत्री लोढ़ा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में मुंबई के हर वॉर्ड में ऐसा अधिकृत कबूतरखाना खोला जाए, ताकि कबूतरों और नागरिकों से जुड़े विवादों का समाधान हो सके।

मंत्री लोढ़ा ने कहा कि जब शहर भर में कबूतरों के दाना-पानी के स्थान बंद किए जा रहे थे, तब जैन समुदाय ने आगे आकर अपनी जमीन पर कबूतरखाना बनाने का बड़ा कदम उठाया। उनके अनुसार, यह पहल न सिर्फ कबूतरों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए राहत लेकर आएगी। दिगंबर जैन समुदाय के पास नेशनल पार्क इलाके में 9 एकड़ जमीन है, जहां पर विभिन्न पशु-पक्षी खुले वातावरण में स्वतंत्र रूप से घूम सकते हैं।

मुंबई में पहला अधिकृत कबूतरखाना

उन्होंने बताया कि बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद कबूतरखानों को बंद किया जा रहा था। लेकिन अब इस कदम के जरिए कानूनी रास्ता निकाला गया है। मंत्री ने गर्व जताया कि कोर्ट के आदेशों के बाद मुंबई में यह पहला अधिकृत कबूतरखाना खोला गया है, जो भविष्य के लिए एक मिसाल बनेगा।

गौरतलब है कि हाल ही में दादर कबूतरखाना को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। स्थानीय निवासियों ने शिकायत की थी कि कबूतरों की बीट से वातावरण दूषित होता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ और अन्य समस्याएं पैदा होती हैं। कई नागरिकों ने इसे हटाने की मांग भी की थी। हालांकि, जैन समुदाय ने इसका विरोध किया और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी खुद उठाने की बात कही थी।

आखिरकार मामला बॉम्बे हाई कोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट ने कबूतरखानों को बंद करने का निर्देश दिया था। इसके बाद जैन समुदाय और प्रशासन के बीच कानूनी समाधान खोजा गया, जिसके तहत नेशनल पार्क क्षेत्र में यह नया कबूतरखाना स्थापित किया गया। माना जा रहा है कि यह पहल भविष्य में ऐसे विवादों को रोकने और कबूतरों के संरक्षण के साथ-साथ नागरिकों की परेशानियों को कम करने में मददगार साबित होगी।