मुंबई महापालिका चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है। एनसीपी के अजित पवार गुट ने पूर्व मंत्री नवाब मलिक को मुंबई चुनाव मैनेजमेंट कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया है। यह जिम्मेदारी खुद उपमुख्यमंत्री अजित पवार और प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे ने सौंपी। यह फैसला इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि बीजेपी लंबे समय से मलिक के नाम पर आपत्ति जताती रही है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें टिकट देने पर बीजेपी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
बीएमसी चुनाव से पहले अजित पवार का दांव
इस नियुक्ति के बाद साफ हो गया है कि एनसीपी (अजित पवार गुट) मुंबई महानगरपालिका चुनाव मलिक की अध्यक्षता में ही लड़ेगी। उनकी टीम में मुंबई के कई अहम पदाधिकारी शामिल किए गए हैं, जिनमें शिवाजीराव नलावडे, सिद्धार्थ कांबळे, विधायक सना मलिक-शेख, पूर्व विधायक ज़ीशान सिद्दीकी, भास्कर विचारे और संजय तटकरे जैसे नाम शामिल हैं। पार्टी का मानना है कि मलिक का संगठनात्मक अनुभव और मुंबई में उनकी पकड़ चुनावी रणनीति को मजबूत करेगा।
बीजेपी और नवाब मलिक का टकराव नया नहीं है। फरवरी 2022 में मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने मलिक को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद वह करीब डेढ़ साल जेल में रहे। अगस्त 2023 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से मेडिकल बेल मिली। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने तत्कालीन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस पर गंभीर आरोप लगाए, जिससे बीजेपी और मलिक के बीच खुला राजनीतिक विवाद और गहरा गया। तब से लेकर अब तक उनके नाम पर बीजेपी की ओर से लगातार आपत्तियां आती रही हैं।
अब अजित पवार द्वारा उन्हें इतनी अहम जिम्मेदारी सौंपे जाने से यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी की प्रतिक्रिया क्या होगी, खासकर तब जब महायुति गठबंधन में उनके नाम को लेकर पहले से ही मतभेद रहे हैं। अगर बीजेपी महायुति के बैनर तले ही बीएमसी चुनाव लड़ने का फैसला करती है, तो उसे अब चुनावी तालमेल और रणनीति को लेकर नवाब मलिक से ही बातचीत करनी होगी। यह कदम आगामी चुनावी समीकरणों को बदल सकता है।





