देश में महंगाई की आंच इतनी तेज हो गई है कि रसोई गैस का सिलेंडर अब सिर्फ खाना ही नहीं, बल्कि आम आदमी की जेब भी झुलसा रहा है। घर का बजट बिगाड़ रही इस बढ़ती कीमत पर अब सियासी पारा भी चढ़ गया है। जनता को किस्तों में झटके देने की इस नीति पर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार वाकई महंगाई पर काबू पा रही है, या सिर्फ जुमलों से काम चला रही है?
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) के मुखिया शरद पवार ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उनका साफ कहना है कि रसोई गैस (एलपीजी) के बढ़ते दाम और लगातार बढ़ती महंगाई आम लोगों की कमर तोड़ रही है। पवार ने दावा किया कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बार-बार हो रही बढ़ोतरी का सीधा बोझ गरीब और मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है, और इस ‘कर्ज’ का ‘मर्ज’ सरकार को चुनाव में चुकाना पड़ेगा।
जब उनसे एलपीजी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बारे में पूछा गया, तो पवार का तंज तीखा था। प्रधानमंत्री के इस दावे पर कि महंगाई को नियंत्रित किया जा रहा है, उन्होंने सवाल उठाया। पवार ने कहा, “प्रधानमंत्री कहते हैं कि महंगाई को नियंत्रित किया जा रहा है। यदि यही नियंत्रण है, तो इसका मतलब लोगों को किस्तों में झटके देना है।” उन्होंने चेतावनी दी कि इन झटकों के लिए जिम्मेदार लोगों को राजनीतिक कीमत चुकानी ही पड़ेगी। जनता इस कर्ज के मर्ज की दवा बेहतर जानती है। वह चुनाव में अपना फर्ज निभाकर इनका पूरा कर्ज उतार को उतावली है।
कांग्रेस नेता ने भाजपा पर लगाया रंग बदलने का आरोप
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने तो भाजपा पर अपने पुराने रंग बदलने का आरोप ही लगा दिया। उनका कहना है कि जब भाजपा विपक्ष में थी, तो महंगाई और रसोई गैस की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी पर भी सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करती थी। तब उनके नेता बड़े-बड़े बयान देते थे, ताली ठोंककर सरकार को घेरते थे। लेकिन अब जब वे खुद सत्ता में हैं, तो ईंधन और एलपीजी की कीमतों में बार-बार बढ़ोतरी के बावजूद उनकी जुबान पर ताले लटके हैं। आम लोगों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर अब वैसी चिंता क्यों नहीं दिख रही, जैसी कभी दिखती थी? यह सवाल जनता के मन में भी घूम रहा है।
वडेट्टीवार ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है और पेट्रोल, डीजल एवं सीएनजी की कीमतों में भी हाल के वर्षों में कई बार संशोधन हुए हैं। यह सिर्फ एक सिलेंडर की कहानी नहीं, बल्कि पूरे देश में ईंधन की कीमतों में आग लगने जैसा है। बता दें कि घरेलू रसोई गैस के दाम में प्रति सिलेंडर 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। और यह सिर्फ एक झटका नहीं है, पिछले तीन महीनों में यह दूसरी बार है, जब घरेलू एलपीजी की कीमत बढ़ाई गई है।
सरकार ने 07 मार्च को बढ़ाए थे गैस के दाम
इससे पहले 07 मार्च को प्रति सिलेंडर 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इसके पीछे पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में वृद्धि को कारण बताया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इसका पूरा बोझ आम आदमी की जेब पर ही डाला जाएगा? पवार और वडेट्टीवार दोनों की चेतावनी साफ है: जनता चुप नहीं बैठेगी। वह जानती है कि कब और कैसे अपने मत से इस महंगाई की मार का हिसाब बराबर करना है। एक-दूसरे से पूछा जा रहा है कि क्या तुम भी इस सियासी रंग बदलने का जवाब दोगे…?






