एक बार फिर समाजवादी पार्टी अपने बयानों के चलते विवादों में घिरती नजर आ रही है, जब उसके महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आजमी ने वंदे मातरम् और सड़क पर पढ़ी जाने वाली नमाज को लेकर तीखे बयान दिए हैं। इन बयानों ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिससे पार्टी पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं और अब भाजपा समेत अन्य दल भी समाजवादी पार्टी पर हमलावर हो सकते हैं।
अबू आजमी ने जहां एक ओर वंदे मातरम् के सीधे विरोध से इनकार किया, वहीं उन्होंने अपनी धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए एक बड़ी लकीर खींच दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धार्मिक सिद्धांतों के अनुसार, अल्लाह के अतिरिक्त किसी और की वंदना करना मुसलमानों के लिए धर्म विरुद्ध है। आजमी ने यह भी रेखांकित किया कि भले ही बहुत से मुसलमान वंदे मातरम् का पाठ करते हों और इसे अपनी राष्ट्रीय भावना का प्रतीक मानते हों, लेकिन जो सच्चा और कट्टर धार्मिक इंसान होगा, वह अल्लाह के अलावा किसी के आगे शीश नहीं झुकाएगा और किसी की स्तुति नहीं करेगा। उनके इस बयान ने वंदे मातरम् को लेकर चल रहे विवाद को और गहरा दिया है। अपनी बात को और पुख्ता करते हुए सपा विधायक ने बताया कि विधानसभा सत्रों के दौरान जब वंदे मातरम् गाया जाता है, तब वे सम्मानपूर्वक खड़े तो रहते हैं, किंतु उसका पाठ नहीं करते। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि उनकी वंदना केवल और केवल अल्लाह के लिए समर्पित है और वे किसी अन्य की वंदना नहीं कर सकते, चाहे स्थिति कुछ भी हो। इस तरह अबू आजमी ने राष्ट्रीय गीत के प्रति अपनी निष्ठा और धार्मिक आस्था के बीच एक स्पष्ट विभाजन रेखा खींच दी है, जिस पर अब तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।
सड़क पर नमाज रोकने के फैसले पर अबू आजमी ने सरकार को घेरा
सड़क पर नमाज पढ़े जाने पर रोक लगाए जाने के मुद्दे पर सपा विधायक अबू आजमी ने सीधे तौर पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने का आरोप लगाकर सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यह एक सुनियोजित और दुर्भावनापूर्ण रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत देश में हर छोटे-बड़े मुद्दे पर मुसलमानों को जानबूझकर घेरा जा रहा है और उन्हें कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। आजमी ने अपनी बात रखते हुए तर्क दिया कि दुनिया भर में जब मस्जिदें श्रद्धालुओं से खचाखच भर जाती हैं, तो नमाज अदा करने वाले लोग मजबूर होकर, खुशी से नहीं बल्कि जगह की कमी के कारण थोड़ी देर के लिए बाहर सड़क पर नमाज पढ़ लेते हैं। यह कोई उनकी इच्छा नहीं बल्कि आवश्यकता है। किंतु, उनके अनुसार, देश के जिन-जिन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकारें सत्तासीन हैं, वहां मस्जिद के बाहर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है, जो कि सरासर भेदभाव और मुस्लिम विरोधी मानसिकता का परिचायक है।
उन्होंने इस पर भी सवाल उठाया कि इसी देश में अन्य धर्मों के लोग सड़कों पर बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित करते हैं और कई-कई दिनों तक सड़कें अवरुद्ध रहती हैं, जिससे आम जनता को भी परेशानी होती है, लेकिन आज तक किसी मुसलमान ने इसका विरोध नहीं किया है। सपा विधायक ने आगे कहा कि ऐसे आयोजनों में तो मुस्लिम समुदाय के लोग उन धर्मों के लोगों को ठंडा पानी पिलाकर उनका स्वागत भी करते हैं और सहिष्णुता का परिचय देते हैं। लेकिन, उनके साथ जो हो रहा है, वह जानबूझकर मुसलमानों को निशाना बनाने की एक गहरी साजिश है, जिसका एकमात्र उद्देश्य बहुसंख्यक समुदाय को यह दिखाना है कि मुसलमानों के साथ जुल्म करके उनके वोट बैंक को मजबूत किया जा सकता है। अबू आजमी ने इस पूरी स्थिति को केवल एक राजनीतिक हथकंडा और सत्ता पाने का आसान रास्ता करार दिया, जिससे देश में सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ रहा है। उनके इन बयानों ने एक बार फिर से राजनीतिक घमासान को तेज कर दिया है और आने वाले समय में इस पर और अधिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।





