धार के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच के फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। दरअसल उद्धव गुट की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मामले पर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने फैसले के बाद सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि हर पक्ष शांतिपूर्वक समाधान के लिए प्रयास करेगा। यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर काफी समय से विवाद चल रहा था और दोनों पक्ष इसे कानूनी दायरे में लेकर गए थे।
दरअसल प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि इंदौर हाई कोर्ट का यह फैसला निश्चित तौर पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिया जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह 11वीं शताब्दी का एक मंदिर है, जिसकी मुख्य मूर्ति को अंग्रेज अपने साथ ले गए थे। यह मूर्ति अभी भी ब्रिटिश म्यूजियम में मौजूद है। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि अब तक मंगलवार को मंदिर में पूजा होती थी और शुक्रवार को नमाज पढ़ी जाती थी। यह निर्णय इन सदियों पुरानी प्रथाओं को किस तरह प्रभावित करेगा, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।
सुप्रीम कोर्ट में निकलेगा निष्कर्ष: प्रियंका चतुर्वेदी
वहीं उद्धव गुट की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने एक तरह का मॉडल तैयार कर लिया है, जिसके तहत हिंदू बनाम मुसलमान का विभाजन पैदा किया जा रहा है। यह एक ऐसी रणनीति है, जिसे भाजपा विभिन्न मुद्दों पर अपनाती रही है। चतुर्वेदी ने आशंका व्यक्त की कि कहीं भोजशाला पर आया यह निर्णय उसी विवाद के घेरे में न आ जाए। अगर ऐसा होता है, तो यह मध्य प्रदेश राज्य के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होगी। उन्होंने अपनी अपेक्षा दोहराई कि सभी पक्ष संयम बरतें और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में कार्य करें, न कि किसी भी तरह की चिंगारी लगाने या राजनैतिक और धार्मिक उन्माद फैलाने का काम करें। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इंदौर हाई कोर्ट का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट तक जाता है, तो देश के सामने एक निश्चित निष्कर्ष आएगा।
हिंदुओं को पूजा का अधिकार दिया
गौरतलब है कि इंदौर हाई कोर्ट ने धार स्थित भोजशाला को मंदिर मानते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने इस ऐतिहासिक स्थल पर हिंदुओं को पूजा का अधिकार दिया है। इसके साथ ही, हाई कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सात अप्रैल 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत मुस्लिमों को हर शुक्रवार भोजशाला परिसर में नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ऐतिहासिक साहित्य इस बात को स्थापित करता है कि यह स्मारक परमार राजवंश के राजा भोज से जुड़ा हुआ है। कोर्ट के अनुसार, भोजशाला में संस्कृत शिक्षण केंद्र और देवी सरस्वती का मंदिर होने के स्पष्ट संकेत मिले हैं। यह निर्णय सदियों पुराने विवाद को एक नई दिशा देता है और इसके दूरगामी परिणाम होने की संभावना है।






