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भोजशाला मामले में हाई कोर्ट के फैसले पर धार में जश्न का माहौल, घर-घर दीपक जलाने की अपील

Reported by:Mohammad Ansar|Edited by:Atul Saxena
Published:
भोजशाला मामले में हाई कोर्ट के फैसले पर धार में जश्न का माहौल, घर-घर दीपक जलाने की अपील

Bhojshala decision celebrated in Dhar

भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर मानने के इंदौर हाई कोर्ट के फैसले के बाद धार में ख़ुशी का माहौल है, अदालत के आदेश के बाद भोजशाला के बहार सैकड़ों की संख्या में हिन्दू समाज के लोग इकट्ठा हो गए, उन्होंने ढोल नगाड़े बजाकर डांस कर अपनी ख़ुशी व्यक्त की, गुलाल उड़ाकर एक दूसरे को गले लगाया

धार में आज सुबह से एक अजीब सा माहौल था, जिला दंडाधिकारी ने जिले में धारा 163 लगा दी थी प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिया था,  पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार माहौल पर नजर बनाये हुई थी, वजह थी भोजशाला मामले में आने वाला हाई कोर्ट का फैसला, आज शुक्रवार होने के कारण भोजशाला में नमाज भी होने थी इसलिए भी एहतियात बरता जा रहा था

इस बीच करीब ढाई बजे इंदौर हाई कोर्ट ने अपना फैसले में भोजशाला को मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दे दिया, कोर्ट ने ASI की 98 दिनों की वैज्ञानिक रिपोर्ट को मान्य किया जिसके अनुसार भोजशाला में हिंदू मंदिर के अवशेष मौजूद थे, अदालत ने हिंदू पक्ष के दावे को स्वीकार करते हुए भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर माना।

इस फैसले पर याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने ख़ुशी जताई है, संस्था के आशीष गोयल ने एक वीडियो जारी कर फैसले का स्वागत किया है, उन्होंने अपील करते हुए कहा कि आज हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, हम इस फैसले का स्वागत करते हैं, उन्होंने कहा कि कोई भी आतिशबाजी ना करे, जुलूस ना  निकाले, आक्रोश व्यक्त ना करे अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करे, विरोध प्रकट ना करे, उन्होंने अपील करते हुए कहा इस फैसले की ख़ुशी में शाम को अपने अपने घर पे एक दीपक अवश्य जलाएं और माँ सरस्वती की पूजा कर उनका आशीर्वाद लें।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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