लगातार बढ़त के बाद 15 मई 2026 को भारतीय सराफा बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। वही चांदी भी 3 लाख के अंदर पहुंच गई है। शुक्रवार को 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम की कीमत 1,60,240 रुपये पर दर्ज की गई है। वहीं, 22 कैरेट सोने के 10 ग्राम का भाव 1,46,900 रुपये रहा। चांदी भी 2, 90,000 रुपए के आसपास कारोबार कर रही है।
केंद्र सरकार द्वारा आयात शुल्क (Import Duty) में 15% की वृद्धि करने और वैश्विक औद्योगिक मांग में वृद्धि होने से पिछले 2 दिनों में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली थी जो बुधवार-गुरुवार की अपेक्षा शुक्रवार को कम रही। डॉलर इंडेक्स में तेजी आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की मांग कम हुई है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ा। ग्लोबल मार्केट में हाजिर सोना (Spot Gold) गिरकर 4,704.30 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गया है। चांदी की कीमत 87.04 डॉलर प्रति औंस दर्ज की गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार चल रही हैं जिससे महंगाई का खतरा भी मंडराने लगा है। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 96 करीब पहुंच गया है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना-चांदी आयात करता है, इसलिए रुपया कमजोर होने से आयात महंगा हो जाता है, जिसका सीधा असर स्थानीय कीमतों पर बढ़त के रूप में दिखता है। साथ ही तेल भी आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपए पर भी देखने को मिलता है।
अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव पर नया अपडेट आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने होर्मुज को खुला रखने में मदद की पेशकश की है, ताकी दोनों देशों के बीच कोई समझौता हो जाए और होर्मुज स्ट्रेट खुला रहे। वहीं, ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियम लागू किए हैं। साथ ही कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज हमारे मित्र देशों के लिए बंद नहीं है बल्कि हमारे दुश्मनों के लिए बंद है। उन्होंने BRICS देशों से अपील की है कि वो अमेरिका और इजराइल की निंदा करें।
इस सारे घटनाक्रम को देखते हुए निवेशकों ने कीमती धातुओं में बिकवाली शुरू कर दी। चुंकी जब भी दुनिया में युद्ध जैसी स्थिति बनती है, निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए सोने-चांदी की ओर रुख करते हैं, जिससे कीमतें प्रभावित होती हैं। निवेशकों को आशंका है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगामी बैठकों में ब्याज दरों में कटौती करने के बजाय उन्हें और बढ़ा सकता है। जानकारों की मानें तो निवेशकों को इस समय जल्दबाजी में बड़ा निवेश करने के बजाय ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनानी चाहिए।
वर्ल्ड बैंक के अनुसार साल 2025 की तुलना में साल 2026 में कीमती धातुओं की कीमत में 42% तक की वृद्धि हो सकती है सोने चांदी और अन्य मेटल की कीमतों में आने वाले समय में उछाल आ सकता है। यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है इसे निवेश की सलाह ना मानें। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं। बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी प्रकार के निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या बाजार विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।






