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भोजशाला पर हाई कोर्ट के फैसले से भावुक हुए CM डॉ. मोहन यादव, बोले- ‘हमारी सांस्कृतिक विरासत के सम्मान का यह महत्वपूर्ण पल’

Written by:Banshika Sharma
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धार भोजशाला पर एमपी हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से मुख्यमंत्री मोहन यादव गदगद हो उठे हैं। दरअसल कोर्ट ने इसे मां वाग्देवी मंदिर माना है, वहीं मुस्लिमों के नमाज अधिकार निरस्त कर प्रबंधन एएसआई को सौंपा है।
भोजशाला पर हाई कोर्ट के फैसले से भावुक हुए CM डॉ. मोहन यादव, बोले- ‘हमारी सांस्कृतिक विरासत के सम्मान का यह महत्वपूर्ण पल’

धार भोजशाला मामले पर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। दरअसल कोर्ट ने धार की ऐतिहासिक भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर घोषित किया है। वहीं इस फैसले पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने इस क्षण को हमारी सांस्कृतिक विरासत के सम्मान का महत्वपूर्ण पल बताया है।

दरअसल उच्च न्यायालय ने विवादित भोजशाला क्षेत्र को मां वाग्देवी का मंदिर माना है। वहीं कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय के नमाज अदा करने के अधिकारों को निरस्त कर दिया है। अब भोजशाला का संपूर्ण प्रबंधन और नियंत्रण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के हाथों में होगा। हिंदुओं को यहां पूजा-अर्चना का अधिकार सुनिश्चित किया गया है।

जानिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने क्या कहा?

वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा धार की ऐतिहासिक भोजशाला को संरक्षित स्मारक एवं मां वाग्देवी की आराधना स्थली मानने का निर्णय हमारी सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का महत्वपूर्ण क्षण है। उन्होंने विश्वास जताया कि एएसआई के संरक्षण एवं प्रबंधन में भोजशाला की गरिमा और अधिक सुदृढ़ होगी तथा श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना का अधिकार सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री ने मां वाग्देवी की प्रतिमा को ब्रिटेन से भारत वापस लाने के संबंध में केंद्र सरकार को विचार करने के निर्देश का स्वागत किया। उन्होंने यह भी कहा कि इस दिशा में राज्य सरकार भी आवश्यक प्रयास करेगी।

संस्कृति सदैव भाईचारे की वाहक : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में सौहार्द और सामाजिक सद्भाव को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति सदैव ‘सर्वधर्म समभाव’, सामाजिक समरसता और भाईचारे की वाहक रही है। हम न्यायालय के निर्णय का पूर्ण सम्मान करते हैं और प्रदेश में सौहार्द, सांस्कृतिक गौरव एवं सामाजिक सद्भाव को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री ने न्यायालय के इस निर्णय को स्वागतयोग्य बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी।

कोर्ट ने मां वाग्देवी का मंदिर माना

गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि भोजशाला एक संरक्षित स्मारक है। कोर्ट ने इसे मां वाग्देवी का मंदिर माना है। यहां हिंदुओं को पूजा-अर्चना का अधिकार दिया गया है। वहीं, मुस्लिम समुदाय द्वारा नमाज अदा करने का अधिकार अब निरस्त कर दिया गया है। भोजशाला का प्रबंधन और नियंत्रण अब पूरी तरह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीन रहेगा।

इसके अतिरिक्त, हाई कोर्ट ने भारत सरकार को लंदन के संग्रहालय से मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने संबंधी प्रस्तुतिकरण पर विचार करने के भी निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा है कि मुस्लिम समुदाय अन्य उपयुक्त भूमि आवंटन के लिए सरकार के समक्ष प्रस्तुतिकरण दे सकता है।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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