
Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को पूर्व लोकसभा सांसद मोहन डेलकर की आत्महत्या से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें नौ लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया गया था। यह याचिका डेलकर के बेटे अभिषेक डेलकर ने दायर की थी, जिसमें उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपील को खारिज कर दिया और साफ किया कि हाईकोर्ट का आदेश अंतिम रूप से मान्य रहेगा। यह फैसला जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 8 सितंबर 2022 को इस मामले में नौ आरोपियों के खिलाफ एफआईआर रद्द कर दी थी। आरोपियों में केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव के तत्कालीन प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल भी शामिल थे। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि इन लोगों ने डेलकर पर प्रशासनिक दबाव और उत्पीड़न डालकर उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि उपलब्ध सबूत इस अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए एफआईआर को रद्द करना उचित है।
गौरतलब है कि मोहन डेलकर दादरा और नगर हवेली से सात बार सांसद रह चुके थे। फरवरी 2021 में वे मुंबई के एक होटल में मृत पाए गए थे। उनकी मौत के बाद आत्महत्या का मामला दर्ज किया गया था। पुलिस जांच में सामने आया था कि डेलकर पर कथित प्रशासनिक दबाव और उत्पीड़न था। यहां तक कि उनके पास से मिले कथित सुसाइड नोट में भी कई नौकरशाहों और राजनीतिक हस्तियों के नाम का जिक्र था। इसके बाद नौ लोगों पर कार्रवाई की गई थी।
इस मामले में डेलकर के बेटे ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सीजेआई बीआर गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की पीठ ने उनकी याचिका पर 4 अगस्त 2025 को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब शीर्ष अदालत ने 18 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के बाद नौ आरोपियों पर दर्ज एफआईआर हमेशा के लिए रद्द मानी जाएगी और मामला यहीं समाप्त हो गया है।
