महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि क्या शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगी? इस अटकल को हवा दी है शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने। न्यूज18 इंडिया से बातचीत में राउत ने कहा कि आने वाले कई म्युनिसिपल चुनाव MNS के साथ मिलकर लड़े जाएंगे, जिसमें मुंबई समेत अन्य शहर भी शामिल हैं। राजनीतिक हलकों में इसे ठाकरे भाइयों के संभावित ‘बड़े गठजोड़’ के रूप में देखा जा रहा है, जो आगामी स्थानीय निकाय और नगर निगम चुनावों में नए समीकरण बना सकता है।
‘मराठी एकता’ का बड़ा गठजोड़
संजय राउत का मानना है कि ठाकरे भाइयों के साथ आने से विपक्ष की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। उन्होंने दावा किया कि यह गठजोड़ होने पर मुंबई, ठाणे, नाशिक, कल्याण और छत्रपति संभाजीनगर जैसे अहम नगर निगमों में जीत आसान हो जाएगी। राउत ने यह भी कहा कि चाहे कोई भी ताकत तोड़ने की कोशिश करे, मराठी लोगों की एकता नहीं टूट सकती। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अगर यह गठबंधन बनता है तो मराठी वोटों में एकजुटता का संदेश जाएगा, जिससे बीजेपी और शिंदे गुट की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
बीजेपी ने राउत के इस बयान पर तीखा पलटवार किया है। पार्टी विधायक प्रवीण डेरेकर ने तंज कसते हुए कहा कि ठाकरे गुट एक अधीर दूल्हे की तरह है, जिसने अपने दिमाग में पहले ही शादी कर ली है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना (UBT) को डर है कि राज ठाकरे के बिना उसका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। बीजेपी का कहना है कि यह गठजोड़ महज राजनीतिक मजबूरी है, क्योंकि उद्धव ठाकरे की पार्टी अकेले चुनाव में अपनी पुरानी पकड़ कायम नहीं रख पा रही।
इस बीच, MNS प्रमुख राज ठाकरे ने भी गुरुवार को पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक की और चुनावी रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि मुंबई में केवल MNS और UBT की ही गहरी जमीनी पकड़ है। राज ठाकरे ने नेताओं से वोटर लिस्ट की सटीकता जांचने और बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने के निर्देश दिए। उनका दावा है कि 2017 से ही MNS इस मुद्दे को उठा रही है। इस संभावित गठजोड़ का सबसे बड़ा असर मुंबई महा नगर पालिका (BMC) चुनाव में देखने को मिल सकता है, जो देश का सबसे अमीर नगर निगम है और जहां सत्ता हासिल करना किसी भी दल के लिए प्रतिष्ठा का सवाल होता है।





