ठेकेदार के गुर्गे उड़ा रहे है नियमों धज्जियां, परेशान होकर ग्रामवासी पहुंचे थाने

ठेकेदार के गुर्गे उड़ा रहे है नियमों धज्जियां, परेशान होकर ग्रामवासी पहुंचे थाने

मंदसौर। तरुण राठौर| जिले में लोग कोरोना से डरे हुए है। ऐसे में शराब ठेकेदार आम लोगो के जीवन के साथ खुलकर खिलवाड़ कर रहा है। संकट काल के इस समय को अवसर में बदल रहा है। इसका उदाहरण रोज जिलेभर के शराब के ठेके पर देखने को मिल रहे है। इस समस्या की ओर न तो आबकारी विभाग ध्यान दे रहा है और नही पुलिस प्रशासन। इसी वजह से शराब ठेकेदार के गुर्गे प्रशासन के नियमो की जमकर धज्जिया उड़ा से बाज नहीं आ रहे है। वहीं अनलॉक 2 की गाइड लाइन की भी जमकर अवेहलना की जा रही है।

ठेके पर बैठे गर्ग़े न तो मुँह पर मास्क लगाते है ओर न ही शराब लेने आ रहे लोगो के हाथ सेनेटाइज करा रहे। न हीं उन्हें मुंह पर मास्क लगाने की हिदादत दे रहे है। जबकि ठेके शराबी सब पास पास खड़े होकर शराब खरीद रहे है। और ठेकेदार उनसे सोशल डिस्टेंस का पालन नही करा रहा है। बस ठेके के बाहर प्रशासन को दिखाने के लिए गोले बना रखे है। जिले के सभी शराब के ठेकों पर बाहर से आए लोग बैठे है। जिनकी जानकारी अबतक आबकारी विभाग सहित पुलिस विभाग को भी नहीं है। जिनकी वजह से जिले में कोरोना फैलने का डर अधिक है। वहीं रोज ये बाहर से आए गुर्गे आम नागरिकों को परेशान करते है। जिसके चलते दलौदा थाने पर मोरखेड़ा के ग्रामवासी शिकायत लेकर पहुंचे थे। उन्होंने बताया था कि किस तरह से ठेकेदार के गुर्गे ने गांव में किस से मारपीट करते हुए जमकर उत्पात मचाया है। यही नहीं राजस्थान की तरफ से आने वाले लोगों को ये रोकते हैं। उन्हें हतियार दिखाकर चमकाते है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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