हारजीत का दांव लगा रहे 8 जुआरियों को धर दबोचा

हारजीत का दांव लगा रहे 8 जुआरियों को धर दबोचा

मुरैना। संजय दीक्षित।

पुलिस अधीक्षक असित यादव के द्वारा अपराधियों पर अंकुश लगाने के लिए धरपकड़ अभियान चलाया जा रहा हैं।इस अभियान में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आशुतोष बागरी और एसडीओपी सुजीत सिंह भदौरिया को मुखबिर द्वारा सूचना मिली कि ग्राम खरिका के हार में कुछ जुआरी हार जीत का दावँ लगा रहे हैं।मुखबिर की सूचना से थाना प्रभारी देवगढ़ जयपाल सिंह गुर्जर , थाना जौरा उपनिरी जयदीप सिंह भदौरिया एवं पुलिस लाइन बल को ले जाकर बुधवार की दोपहर खरिका के हार में दविश दी तो जुआरी पुलिस को देखकर भागने लगे।तभी पुलिस ने चारों तरफ से घेराबन्दी कर 8 जुआरियों को धर दबोचा।जुआरियों के कब्जे से 72030 रुपए,6 मोबाइल,5 तांश की गड्डी एवं 1 अपाची मोटरसाइकिल जप्त की हैं।जुआरियों को पकड़ने में जौरा एसडीओपी सुजीत सिंह भदौरिया,थाना प्रभारी देवगढ़ जयपाल सिंह गुर्जर,उनिरी.जयदीप सिंह भदौरिया सहित समस्त स्टाफ की अहम भूमिका रही।।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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