बंपर वोटिंग से बढ़ी बेचैनी, शिवराज बोले- जीत भी बंपर होगी

बंपर वोटिंग से बढ़ी बेचैनी, शिवराज बोले- जीत भी बंपर होगी

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| मध्यप्रदेश (Madhyapradesh) की 28 विधानसभा सीटों पर मंगलवार को बंपर वोटिंग हुई है। कोरोना काल में हो रहे उपचुनाव (Byelection) में लोगों ने बढ़चढ़ कर मतदान किया, बंपर वोटिंग से भाजपा (BJP) और कांग्रेस (Congress) दोनों दल हैरान है, इससे कई नेताओं की धड़कनें भी बढ़ रही हैं, बम्पर वोटिंग के क्या मायने हो सकते हैं इसकी चर्चा शुरू हो गई है| इधर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने कहा जितनी बंपर वोटिंग हुई है उतनी बंपर हमारी जीत होगी|

सीएम शिवराज ने कहा कोरोना के भय का असर कहीं नहीं दिखा, जनता ने उत्साहपूर्वक बढ़ चढ़कर उप चुनाव में भाग लिया। बंपर वोटिंग हुई है। जनता ने लोकतंत्र में विश्वास व्यक्त करते हुए मतदान को अपना पवित्र कर्तव्य माना है। कुछ स्थानों पर 2018 से ज्यादा वोटिंग हुई है। जितनी बंपर वोटिंग हुई है उतनी बंपर हमारी जीत होगी|

बौखलाहट बता रही कांग्रेस ने हार स्वीकार ली
सीएम शिवराज ने कहा कांग्रेस की बौखलाहट स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही, लोकतंत्र का मजाक उड़ाया जा रहा है| ईवीएम पर उंगलियां उठाई जा रही हैं| 2018 में जब कांग्रेस की सरकार बनी तो ईवीएम ठीक थी?| शिवराज ने कहा अधिकारियों कर्मचारियों को धमकाया जा रहा है, उनका भी आत्मसम्मान है, अफसर को देख लोगे, यह धमकी लोकतंत्र का मजाक है और अधिकारियों का अपमान है, इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस अपनी पराजय स्वीकार कर ली है|

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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