इमरती का पलटवार, पागल हो गए बंगाली कमलनाथ, देखिये वीडियो

इमरती का पलटवार, पागल हो गए बंगाली कमलनाथ, देखिये वीडियो

डबरा, सलिल श्रीवास्तव| पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamalnath) द्वारा मध्यप्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी (Imarti Devi) को डबरा की आम सभा में रविवार को आइटम (Item) कहे जाने का मामला तूल पकड़ गया है| जहां पूरी बीजेपी (BJP) इस बयान की खिलाफत कर रही है और खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh) सोमवार को मिंटो हॉल में इस बयान के विरोध में मौन व्रत करने वाले हैं| वही महिला बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है|

उनका कहना है कि कमलनाथ बंगाली है महिलाओं का सम्मान करना वह क्या जाने नवदुर्गा में जिस तरह से महिलाओं का सम्मान किया जाता है उसे कमलनाथ वाकिफ नहीं है उल्टे जब से मुख्यमंत्री पद से वह हटे हैं तब से वह पागल हो गए हैं और वह कुछ भी अनाप-शनाप बक रहे हैं उनके इस बयान का जवाब तो जनता ही उन्हें देगी पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह द्वारा इमरती देवी को जलेबी कहे जाने के बयान पर इमरती ने कहा कि उस व्यक्ति ने तो अपनी मां और बहन तक की इज्जत नहीं की और उन्हें धक्के मार के घर से बाहर निकाल दिया वह व्यक्ति किसी अन्य महिला की इज्जत क्या कर सकता है अजय सिंह पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि वह लोकसभा का चुनाव लड़े विधानसभा का चुनाव लड़े लेकिन चुनाव हार गए कांग्रेस किस विधानसभा में एक भी सीट नहीं जीतने वाली|

बयान से आहत इमरती फूट फूट कर रोने लगी
कमलनाथ के बयान से आहत इमरती देवी एक निजी चैनल पर फूट फूट कर रोई| उन्होंने कहां मैं उन्हें बड़ा भाई मानती थी, पांव छूती थी लेकिन उन्होंने सारी मर्यादा तोड़ दी| इमरती देवी ने सोनिया गांधी से अपील करते हुए कहा कि ऐसे आदमी को पार्टी से बाहर करें| कमलनाथ की नीयत ख़राब है
कमलनाथ को उन्होंने राक्षस तक कह डाला|

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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