दिग्विजय पर रामेश्वर का पलटवार, कहा- ‘दिल से क्यों उतर रहा दल इस पर विचार करना चाहिए’

दिग्विजय पर रामेश्वर का पलटवार, कहा- ‘दिल से क्यों उतर रहा दल इस पर विचार करना चाहिए’

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| मध्य प्रदेश (Madhyapradesh) की 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव (Byelection) में रविवार को सियासी उबाल आ गया| दमोह से कांग्रेस विधायक रहे राहुल लोधी (Rahul Lodhi) के भाजपा में जाने के बाद बयानबाजी का दौर तेज हो गया है| पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) के ‘मामा के झोले की काली कमाई में एक और विधायक बिका’ वाले ट्वीट पर प्रोटेम स्पीकर व बीजेपी के दिग्गज विधायक रामेश्वर शर्मा (Rameshwar Sharma) ने दिग्विजय पर बड़ा हमला बोला है|

बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने ट्वीट कर दिग्विजय सिंह पर पलटवार किया है| उन्होंने ट्वीट कर लिखा- 6 दिसम्बर 1992 में प्रभु श्रीराम का उद्घोष करने वाली दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश एवं राजस्थान की तत्कालीन सरकारो को एक झटके में गिराने वाले आज लोकतंत्र की दुहाई दें रहें है| दिलों से क्यों उतर रहा है दल इसपर विचार करो नही तो श्रीराम नाम सत्य है|

मामा के झोले की काली कमाई में एक और विधायक बिका-दिग्विजय
इससे पहले दिग्विजय सिंह ने राहुल लोधी के भाजपा में जाने पर ट्वीट कर बड़ा आरोप लगाया था| उन्होंने लिखा था- मामा के झोले की काली कमाई में एक और विधायक बिका। लगता है भाजपा में असली भाजपाइयों से अधिक बिके हुए ग़द्दार कॉंग्रेसी मामा भर देगा। मुझे उन ईमानदार संघ व भाजपा के कार्यकर्ताओं पर दया आती है जिन्होंने भाजपा को यहाँ तक पहुँचाया। जयंत मलैया जी कहॉं हैं?

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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