एक हाथ में बैट और एक हाथ में पोस्टर लेकर अकेले ही प्रचार में जुटा यह प्रत्याशी

एक हाथ में बैट और एक हाथ में पोस्टर लेकर अकेले ही प्रचार में जुटा यह प्रत्याशी

भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| मध्य प्रदेश (Madhyapradesh) की 28 सीटों पर उपचुनाव (Byelection) में जीत के लिए राजनीतिक दल पूरे दमखम से जोर लगा रहे हैं, स्टार प्रचारकों की सभाएं, रोड शो, भारी भीड़, दिग्गजों का मेला लगा हुआ है| इसके उलट इस शोबाजी के दौर में एक प्रत्याशी (Candidate) ऐसा भी है जो अकेले ही एक हाथ में बल्ला और एक हाथ में पोस्टर लेकर प्रचार कर रहा हैं|

हम बात कर रहे हैं गजराज सिंह मंडलोई (Gajraj Singh Mandloi) की । मंडलोई खंडवा जिले की मांधता विधानसभा (Mandhata Assembly Byelection) से निर्दलीय प्रत्याशी हैं। वे अकेले अपना पोस्टर लिए चुनाव प्रचार (Election Campaigning) कर रहे हैं। वे गांव-गांव पैदल जाकर और हाईवे पर खड़े होकर वोट मांग रहे हैं।

मंडलोई का चुनाव चिन्ह बैट्समैन बल्लेबाज है। इसी कारण गजराज अब क्रिकेट बैट लेकर मैदान में कूद पड़े हैं। मंडलोई रोजाना एक हाथ में क्रिकेट का बल्ला और एक हाथ में अपना छोटा सा पोस्टर लेकर निकल जाते हैं| वे भाजपा और कांग्रेस की सभाओं के बाहर अपना प्रचार करते नजर आते हैं| अपना बल्ला लेकर बाजार और दुकानों पर भी जाते हैं और लोगों से वोट के लिए अपील करते हैं|

जिस दौर में चुनाव जीतने के लिए प्रत्याशी और राजनीतिक दल पैसा पानी की तरह बहा रहे हैं, ऐसे में एक निर्दलीय प्रत्याशी का प्रचार करने का यह तरीका चर्चा में है| मंडलोई का कहना है कि मेरे पास कोई साधन नहीं है, इसलिए पैदल ही घूमकर प्रचार कर रहे हैं। वे क्षेत्र में वर्तमान राजनीतिक हालात से दुखी है इसलिए निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं|

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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