
आज संसद में केंद्र सरकार द्वारा तीन विधेयक पेश किए जाएंगे, जिसमें किसी प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री या किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के मंत्री को गंभीर आपराधिक आरोपों में लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार या हिरासत में रखने की बात कही गई है। आज केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया जाएगा।
हालांकि इस विधेयक को लेकर विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला है। दरअसल, कांग्रेस पार्टी का कहना है कि विधेयक में कुछ भी नहीं है, यह सिर्फ़ इसलिए पेश किया जा रहा है ताकि राहुल गांधी की बिहार में “वॉटर अधिकार रैली” से लोगों का ध्यान भटकाया जा सके। चलिए जानते हैं इस विधेयक में क्या है।
आज कुल तीन विधेयक पेश किए जाएंगे
दरअसल, आज गृहमंत्री अमित शाह द्वारा कुल तीन विधेयक पेश किए जाएंगे। इन तीन विधेयकों में 130वां संविधान संशोधन विधेयक, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक और संघ राज्य क्षेत्र सरकार संशोधन विधेयक शामिल हैं। इन तीनों विधेयकों को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा संसद की संयुक्त समिति को भेजने के लिए लोकसभा में प्रस्ताव पेश किया जाएगा।
इस विधेयक में क्या कहा गया है?
दरअसल, इस विधेयक में बताया गया है कि “अगर कोई मंत्री अपने पद पर रहते हुए 30 दिनों की अवधि में किसी कानून के तहत अपराध करने के कारण गिरफ्तार होता है और इस अपराध में उसे दोषी पाया जाता है, तो ऐसे में 5 साल या उससे ज़्यादा की अवधि की जेल की सज़ा हो सकती है।”
अब मंत्री भी नहीं कर सकेंगे अपराध?
बिल में स्पष्ट किया गया है कि “अगर ऐसा होता है तो उसे हिरासत में लिए जाने के बाद 31वें दिन तक प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा पद से हटा दिया जाएगा और अगर प्रधानमंत्री की सलाह 31 दिन तक राष्ट्रपति को नहीं दी जाती है, तो वह उसके बाद आने वाले दिन से मंत्री नहीं रह जाएगा।” मौजूदा समय में अगर कोई नेता या मंत्री अपने पद पर रहते हुए किसी आरोप में गिरफ्तार होता है, तो उसे पद से इस्तीफा नहीं देना पड़ता है और पद पर बने रहने में कोई रोक नहीं है। हाल ही में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का मामला सामने आया था, जहां गिरफ्तारी के बाद भी वे सरकार में बने रहे। ऐसे में अब इस विधेयक के आ जाने से आरोपी मंत्रियों को पद से हटा दिया जाएगा।
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