15 जून के बाद फिर से लगेगा संपूर्ण लॉकडाउन? जानें क्या है सच्चाई

15 जून के बाद फिर से लगेगा संपूर्ण लॉकडाउन? जानें क्या है सच्चाई

नई दिल्ली| देश भर में लागू लॉकडाउन (Lockdown) के चौथे चरण के बाद केंद्र सरकार ने अनलॉक 1.0 (Unlock1.0) लागू किया गया है। इस दौरान धीरे धीरे सरकार रियायत देती जा रही है। हालाँकि कोरोना के मामले इस बीच थम नहीं रहे हैं| कोरोना (Coronavirus) के बढ़ते मामलों के बीच अफवाहों का दौर भी जारी है| इन दिनों लॉकडाउन को लेकर एक वायरल मैसेज ने लोगों को परेशान कर दिया है| जिसमें दावा किया जा रहा है कि कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए देशभर में 15 जून से एक बार फिर पूर्ण लॉकडाउन लगा दिया जाएगा|

एक न्यूज चैनल के बुलेटिन के स्क्रीनशॉट को फोटोशॉप कर ये फर्जी खबर फैलाई जा रही है। इस स्क्रीनशॉट में लिखा दिख रहा है- ’15 जून के बाद फिर से हो सकता है संपूर्ण लॉकडाउन. गृह मंत्रालय ने दिये संकेत, ट्रेन और हवाई सफर पर लगेगा. ब्रेक कोरोना की बढ़ती रफ्तार के बाद लिया गया फैसला.’

Fact Check में फर्जी निकला मैसेज
इस वायरल खबर पर प्रेस इंफॉर्मेशन ब्‍यूरो ( PIB) ने Fact Check किया. PIB ने वायरल मैसेज को पूरी तरह से गलत और भ्रामक बताया| PIB ने Fact Check करते हुए ट्वीट किया कि ‘सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही एक फोटो में दावा किया जा रहा है कि गृह मंत्रालय द्वारा ट्रेन और हवाई यात्रा पर प्रतिबंध के साथ 15 जून से देश में फिर से पूर्ण लॉकडाउन लागू किया जा सकता है. #PIBFactcheck- यह #Fake है. फेक न्यूज फैलाने वाली ऐसी भ्रामक फोटो से सावधान रहें|

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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