दिल्ली में मप्र के मजदूरों से मिले राहुल गांधी, फुटपाथ पर बैठकर जाना हाल

दिल्ली में मप्र के मजदूरों से मिले राहुल गांधी, फुटपाथ पर बैठकर जाना हाल

नई दिल्ली| लॉक डाउन (Lockdown) के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने शनिवार को दिल्ली प्रवासी मजदूरों से बातचीत की जो लॉकडाउन में काम बंद होने के चलते अपने मूल राज्यों में लौट रहे थे। इनमे मध्य प्रदेश के मजदूर भी शामिल थे| इस दौरान उन्होंने मजदूरों से बातचीत की और प्रवासी मजदूरों से उनके परेशानियों के साथ दिल्ली से जाने की वजहों के बारे में भी पूछा।

काले रंग की पैंट और सफेद कुर्ता पहने राहुल गांधी शनिवार को दिल्ली के सुखदेव विहार फ्लाइओवर के पास प्रवासी मजदूरों से मिलने पहुंचे| बताया जा रहा है कि सुखदेव विहार में सड़क किनारे फुटपाथ पर बैठे प्रवासी मजदूरों से बातचीत के दौरान वह करीब 1 घंटा 30 मिनट तक यहां पर रहे फिर चले गए।

मध्य प्रदेश कांग्रेस (Madhya Pradesh Congress) ने ट्वीट कर कहा कि राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश आ रहे मजदूरों से चर्चा की| ट्वीटर पर एक वीडियो भी शेयर किया गया है जिसमे राहुल गाँधी से मिलने के बाद मजदूर युवक ने दिल्ली छोड़ने की वजह बताई और कहा कि आखिर किसी ने तो हमारी सुनी| मप्र कांग्रेस ने ट्वीट में लिखा ‘कांग्रेस नेता राहुल गांधी जी ने आज दिल्ली में मध्यप्रदेश आ रहे मज़दूरों से चर्चा की और उन्हें मदद उपलब्ध कराकर मानव सेवा का श्रेष्ठतम उदाहरण प्रस्तुत किया। जनता का दर्द समझते हैं, जनसेवा के लिये उतरते हैं’।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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