AI इम्पैक्ट समिट-2026 संपन्न: 88 देशों ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना से AI को सर्वसुलभ बनाने का लिया संकल्प, नई दिल्ली घोषणा पत्र जारी

नई दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट-2026 में 88 देशों और संगठनों ने एक ऐतिहासिक घोषणा-पत्र जारी किया है। इसका मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को कुछ देशों तक सीमित न रखकर 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना के साथ पूरी मानवता के लिए सुलभ और किफायती बनाना है।
AI Impact Summit-2026

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य की दिशा तय करते हुए भारत की राजधानी में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट-2026 एक बड़े संदेश के साथ संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में जुटे 88 देशों व अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने शनिवार को “नई दिल्ली घोषणा-पत्र” को अपनाया, जिसमें AI को वैश्विक सार्वजनिक हित के तौर पर स्थापित करने का संकल्प लिया गया। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि यह शक्तिशाली तकनीक कुछ कंपनियों या देशों की जागीर न बनकर रह जाए।

सम्मेलन का केंद्रीय विचार ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भारतीय परंपरा से प्रेरित था। घोषणा-पत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि AI के लाभ “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के सिद्धांत पर आधारित होने चाहिए, ताकि दुनिया के हर व्यक्ति तक इसके संसाधन आसानी से और किफायती कीमत पर पहुंच सकें।

घोषणा-पत्र के सात आधारस्तंभ

वैश्विक AI सहयोग को एक मजबूत ढांचा देने के लिए नई दिल्ली घोषणा में सात प्रमुख स्तंभ निर्धारित किए गए हैं। इनमें AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण, आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देना, सुरक्षित और विश्वसनीय AI का निर्माण, विज्ञान के क्षेत्र में AI का उपयोग, सामाजिक सशक्तिकरण के लिए इसकी पहुंच बढ़ाना, मानव संसाधन विकास, और एक कुशल AI तंत्र का विकास शामिल है। इन स्तंभों को वैश्विक सहयोग का आधार माना गया है।

वैश्विक सहयोग के लिए नई पहलें

घोषणा-पत्र में कई महत्वपूर्ण पहलों का ऐलान किया गया है। इसमें “ग्लोबल एआई इम्पैक्ट कॉमन्स” नामक एक मंच की स्थापना की जाएगी, जो विभिन्न देशों में सफल AI उपयोग के मामलों को साझा करने और उन्हें विस्तारित करने में मदद करेगा। इसी तरह, सुरक्षित और पारदर्शी AI सिस्टम के विकास के लिए “विश्वसनीय एआई कॉमन्स” को एक भंडार के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ उपकरण, मानक और सर्वोत्तम प्रथाएं उपलब्ध होंगी।

इसके अलावा, “एआई के लोकतांत्रिक प्रसार के लिए चार्टर” को एक स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी ढांचे के रूप में स्वीकार किया गया है, जिसका उद्देश्य बुनियादी AI संसाधनों तक सभी की पहुंच को आसान बनाना है।

कौशल विकास और सामाजिक कल्याण पर फोकस

यह स्वीकार किया गया कि AI के बढ़ते उपयोग के लिए एक कुशल कार्यबल की आवश्यकता होगी। इसके लिए मानव पूंजी विकास के तहत AI स्किलिंग, री-स्किलिंग और AI साक्षरता पर विशेष बल दिया गया। “एआई वर्कफोर्स डेवलपमेंट प्लेबुक” को भविष्य की AI-चालित अर्थव्यवस्था की तैयारी का आधार माना गया है। घोषणा में शिक्षा, स्वास्थ्य, शासन और सार्वजनिक सेवाओं में AI की समान पहुंच सुनिश्चित कर सामाजिक सशक्तिकरण पर भी जोर दिया गया है।

सम्मेलन में यह भी माना गया कि AI के विकास से ऊर्जा और ढांचागत सुविधाओं की मांग बढ़ेगी। इसलिए, ऊर्जा-कुशल और इनोवेटिव AI प्रणालियों के विकास को प्राथमिकता देने पर भी सहमति बनी है। नई दिल्ली से जारी यह संदेश AI को मानवता के साझा भविष्य का आधार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews