
संसद के मॉनसून सत्र से पहले रविवार को सर्वदलीय बैठक हुई। इसमें विपक्षी दलों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), पहलगाम आतंकवादी हमला और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संघर्षविराम संबंधी दावों जैसे मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। सरकार ने सदन के सुचारू संचालन के लिए विपक्ष से सहयोग की अपील की। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विभिन्न दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया।
कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने बैठक के बाद कहा कि उनकी पार्टी बिहार में एसआईआर, पहलगाम हमले की चूकों और ट्रंप के दावों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद में बयान की मांग करती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन मुद्दों पर प्रधानमंत्री का बयान देना उनका दायित्व है। वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) के संजय सिंह ने बिहार में एसआईआर को चुनावी घोटाला करार देते हुए और ट्रंप के मध्यस्थता दावों पर सवाल उठाए।
कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता
बीजू जनता दल (बीजद) के सस्मित पात्रा ने ओडिशा में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने एक कॉलेज छात्रा की ओर से आत्मदाह और 15 वर्षीय किशोरी को आग लगाए जाने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ओडिशा में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और भाजपा सरकार विफल साबित हुई है। उन्होंने इन मुद्दों पर संसद में बहस की मांग की।
ऑपरेशन सिंदूर अचानक रुकने पर सवाल
विपक्षी गठबंधन इंडिया के 24 दलों ने शनिवार को तय किया था कि वे पहलगाम हमले, ऑपरेशन सिंदूर के अचानक रुकने, ट्रंप के दावों और बिहार में एसआईआर जैसे मुद्दों को सत्र में प्रमुखता से उठाएंगे। बैठक में कांग्रेस, राकांपा (शरद पवार), द्रमुक और आरपीआई (ए) जैसे दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू और अर्जुन राम मेघवाल ने सरकार का प्रतिनिधित्व किया।
